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हसनपुर लुहारी की लिटिल रेसलर सिस्टर्स

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मुजफ्फरनगर

बच्चियों पर दृश्य-अदृश्य शिकंजों के बीच कुछ खबरें सुखद हवा के झोंकों जैसी होती हैं। मशहूर पहलवान फोगाट सिस्टर्स की तर्ज पर शामली जिले के हसनपुर लुहारी गांव में तीन बच्चियां अखाड़े में उतरी हैं।  इन तीनों बहनों की शुरुआती उपलब्धियां उनके सुनहरे भविष्य की तरफ इशारा करती हैं।
ये लिटिल रेसलर सिस्टर्स हैं 12 साल की शगुन, 10 साल की वेदी और 7 साल की अवनि। तमाम अंतर्विरोधों वाले समाज के एक सामन्य मध्यवर्गीय परिवार की इन बच्चियों का पहलवानी का सफर कुछ महीनों पहले अचानक ही शुरू हुआ। दरअसल, पिता अमित सैनी अपनी इन बेटियों को अपने साथ बैडमिंटन कोर्ट ले जाते थे और उन्हें भी प्रैक्टिस के लिए प्रेरित करते थे। गांव के मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी हसीन खान की बेटी अक़्शा युसूफजई पिता से प्रेरणा लेकर इस खेल में खासी शोहरत बटोर रही हैं। जाहिर है कि उनकी उपलब्धियां भी दूसरी बच्चियों के पिताओं को प्रेरित करने वाली हैं। दिलचस्प यह रहा कि शगुन ने अपने पापा से अनुरोध किया कि वह कुश्ती सीखना चाहती है। उसकी इच्छा के पीछे मशहूर रेसलर्स फोगाट सिस्टर्स पर बनी आमिर खान की मशहूर फिल्म `दंगल` भी थी। शर्मीले स्वभाव की यह बच्ची शगुन बताती है कि गीता-बबीता को फिल्म में देखकर उसके मन में वैसा बनने की इच्छा हुई थी। अमित सैनी के लिए दिक्कत यह थी कि गांव में शगुन को कुश्ती सिखाएगा कौन। लेकिन, मुहल्ले के ही रहने वाले पारिवारिक मित्र अहसान हाशमी इस काम के लिए आगे आए।
उस्ताद अहसान हाशमी पहले जलालाबाद में और आजकल अपने गांव हसनपुर लुहारी में ही किशोरों औऱ युवाओं को कुश्ती के दांव-पेंच सिखाते हैं। करीब सात महीने पहले वे शगुन को अपने साथ अखाड़े में ले गए तो छोटी बहनें वेदी और अवनि भी साथ हो लीं। बच्चियों ने पहलवानी के गुर सीखने में कमाल का उत्साह दिखाया। अखाड़े में बच्चियों का उतरना यूं भी चर्चा का विषय बनना था लेकिन असली चर्चा की वजह शगुन का अपनी उम्र से बड़े लड़कों को आसानी से चित्त कर देने का सिलसिला बन जाना रहा। इससे उत्साहित होकर उस्ताद अहसान हाशमी और पिता अमित सैनी शगुन को सहारनपुर जिले के गंगोह के गांव बरछी के भोला शंकर के मेले में हुए दंगल में ले गए। एक बच्ची का अखाड़े में उतरना वहां भी रोमांचकारी साबित हुआ। `दंगल` फिल्म का असर लोगों पर था ही, शगुन ने भी उन्हें निराश नहीं किया। अपने से इक्कीस दिखाई दे रहे लड़के पर उसने आसानी से फतेह पा ली।
गंगोह से इनाम और मिठाई के साथ लौटी शगुन ने इसके बाद मुजफ्फरनगर के चरथावल इलाके के कुटेसरा गांव के दंगल में भी हिस्सा लिया। यहां भी उसका मुकाबला अपने से बड़े लड़के से ही हुआ। कुश्ती बराबरी पर छुटी। बच्ची के प्रदर्शन से प्रभावित चेयरमैन ने उसे 1100 रुपये इनाम के तौर पर दिए। वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों ने भी उसकी हौसलाआफजाई की। बच्ची के लिए पुलिस अफसरों को साथ फोटो खिंचाना स्वाभाविक रूप से बड़ी यादगार की तरह बन गया है।
शगुन की छोटी बहनें भी गांव में कुश्तियां जीत रही हैं और इस बात को झूठ साबित कर रही हैं कि लड़कियां किसी तरह से कमतर हैं। हसनपुर लुहारी में 12 से 15 अप्रैल तक दंगल होने जा रहा है और ये बच्चियां इसके लिए तैयारी में जुटी हैं। दंगल फिल्म का डायलोग गांव में मशहूर हो रहा है- म्हारी छोरियां भी छोरों से कम नी हैं। उम्मीद है कि उनकी वजह से दूसरी बच्चियों के लिए भी इस खेल का रास्ता खुलेगा। एडवोकेट रफीउल्ला खान भी अपनी बच्ची को अखाड़े में भेजना शुरू कर चुके हैं।
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One Comment

  1. ankur Kumar ankur Kumar अप्रैल 9, 2018

    मुझे गर्व है, मेरे गांव के अभिभावक भी बच्चों(खासकर बच्चियों को) को उनकी मनपसंद का क्षेत्र चुनने की आज़ादी दे रहे हैं.

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