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ज्येष्ठ के अधिक मास के चलते पौराणिक तीर्थ शुकताल में उमड़ेगी की श्रद्धालुओं की भारी भीड़

शुक्रताल (मुजफ्फरनगर) ।

ज्येष्ठ माह में अधिक मास के चलते पौराणिक तीर्थ शुकताल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी । बताया जाता है कि सभी आश्रमों,मन्दिरों और मठों में भक्तों ने कराये आरक्षण करा लिए है।। देश के कई लब्धप्रतिष्ठित सन्त और कथावाचक शुकताल पहुँच रहे है।माँ गंगा के तट पर अवस्थित इस तीर्थ में एक माह तक भागवत की रस धारा बहेगीं। हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष 2018 में दो ज्येष्ठ माह होंगे । हिन्दू पंचांगों के अनुसार तीन वर्षों तक तिथियों का क्षय होता है।तिथियों का क्षय होने से तीसरे वर्ष एक मास बन जाता है इसी कारण हर तीसरे वर्ष अधिक मास होता है । इस आने वाले वर्ष 2018 में 16 मई से 13 जून की अवधि अधिक मास की रहेगी।अधिक मास को मल मास, पुरुषोत्तम मास आदि नामों से पुकारा ज्याता हैं।जिस चन्द्र मास में सूर्य संक्रांति नही होती वह अधिक मास कहलाता है। सम्पूर्ण मास में श्रीमद्भागवत कथा,धार्मिक कथा पुराण,पुरुषोत्तम मास की कथा,अवन्ति महात्यम आदि की कथाओं का श्रवण का अत्यधिक महत्व है। शुकताल यानि शुकतीर्थ में श्रीमद्भागवत की कथा का विमोचन हुआ था।तत्कालीन भारत सम्राट व धनुर्धारी अर्जुन के पौत्र महराज परीक्षित को शुकदेव मुनि ने श्रीमद्भागवत की कथा सुना कर विश्व को मृत्यु के भय से मुक्त किया था।अनेक धर्माचार्यों का मानना है कि यदि शुकदेव मुनि का इस धरा धाम पर अवतरण ना हुआ होता तो महाभारत के युद्ध के बाद अवसाद में डूबी ये भारत की जनता नास्तिक हो जाती।शुकदेव मुनि ने श्रीमद्भागवत की कथा के माध्यम से ही भारत को भक्ति मार्ग का रास्ता दिखाया।इस वर्ष पुरुषोत्तम मास पड़ने के कारण देश विदेश के वैष्णव जन बड़ी संख्या में शुकतीर्थ में एकत्रित हो कर श्रीमद्भागवत की कथा का श्रवण करेंगे।शुक्रताल के किसी भी आश्रम में अब जगह नही है।जो प्रमुख सन्त और कथावाचक तीर्थ में आ रहें है उनमें स्वामी रामभद्राचार्य, किरीट भाई सहित बड़ी संख्या में भागवत मर्मज्ञ पधार रहे है।आश्रमों को सजाया सँवारा जा रहा है।अनेक भागवत भक्तों को स्थान न मिलने से निराशा भी हुई है।

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