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अफगानी सिखों को स्थाई नागरिकता दिलवाएंगे  –दिल्ली के अफगानी बस्ती में शोक समागम, पहुंचे अकाली

नई दिल्ली: 4 जुलाई (ब्यूरो) : शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने आज यहां कहा कि अफगानिस्तान से भारत आये सिखों को संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में नागरिकता बिल पास करवाकर स्थाई नागरिकता दिलवाने की कोशिश की जायेगी। बादल ने कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। 35 साल पहले जब मैं काबुल गया था तब अफगानिस्तान खुशहाल देश था, पर कुछ लोगों द्वारा तबाही की रची गई साजिश ने अफगानिस्तान को खत्म कर दिया है। आज सारी कौम को एक झंडे के नीचे खड़ा होने की जरूरत है। बादल दिल्ली के गुरुद्वारा गुरू अर्जन देव जी, न्यू महावीर नगर में अफगानिस्तान में मारे गये सिखों की याद में अफगानी संगत द्वारा आयोजित समागम में पहुंचे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि संगतों ने हमेशा शिरोमणी अकाली दल को पंथ की प्रतिनिधि संस्था के तौर पर कार्य करने की ताकत दी है। बादल ने कहा कि सिखों ने हमेशा देश की चढ़दीकला के लिए स्वयं को समर्पित किया है। चाहे बात देश की आजादी की हो या आपातकाल की सिख हमेशा ही जुल्म के खिलाफ खड़े हुए हैं। अकाली दल पूरी कोशिश करेगा कि विरोधी पार्टीयों को विश्वास में लेकर 20 जुलाई को शुरू हो रहे मानसून सत्र के दौरान अफगानी सिखों की नागरिकता के बिल को पास करवाया जाये।
बादल ने इस सबंधी राज्यसभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींडसा के नेतृत्व में तालमेल कमेटी बनाने का ऐलान किया। कमेटी के सदस्य के तौर पर दिल्ली कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के., महासचिव मनजिन्दर सिंह सिरसा, पूर्व अध्यक्ष अवतार सिंह हित को रखा है।
इस मौके पर भारत में अफगानिस्तान के राजदूत मोहम्मद अब्दाली ने कहा कि मारे गये लोग सिख होने से पहले अफगानिस्तान के नागरिक थे। इसलिए उनकी देश के लिए हुई शहादत को व्यर्थ नहीं जाने दिया जायेगा। अफगान सरकार सिखों की हर परेशानी का हल निकालने के लिए आपके साथ खड़ी है।
   कमेटी अध्यक्ष मंजीत सिंह जी.के. ने कहा कि मारे गये सिखों की याद में दिल्ली कमेटी द्वारा 7 जुलाई को गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब शुरू करेगी। साथ ही 9 जुलाई को अरदास समागम करेगी। जी.के. ने कहा कि लोकसभा में स्थायी नागरिकता का बिल पास हो चुका है। मौजूदा सरकार ने राज्यसभा में बिल ना पास होने के कारण अध्यादेश निकाल कर आपको राहत देने की कोशिश की थी। इसके लिए सबसे ज्यादा ताकत केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल तथा पूर्व सांसद त्रिलोचन सिंह ने लगाई थी। अफगानी सिखों ने ऐतिहासिक गुरुद्वारों की सेवा संभाल को अपनी जान की बाजी लगाकर सिरे चढ़ाया हुआ है, इसलिए यह कौम की लड़ाई है।
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