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अलग ही अंदाज है बरसाना की होली का !

भगवान श्रीकृष्ण की जन्म भूमि मथुरा में होली का त्योहार पूरे धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन बरसाना की होली की अलग ही रंगत है। बरसाना की खास ‘लठ्ठमार होली’ को देखने के लिए दूर दूर से लोग उमड़ते हैं।

ये होली इसलिए भी खास है क्योंकि इस होली में मोटी बांस की लाठियों से औरतें हुरियारों को मारती हैं। पुरुष मार से से बचने की कोशिश करते हैं।

अपने आप को बचाने की जुगत में वो महिलाओं पर पानी फेंकते हैं। लेकिन इस प्यार भरी जंग में न तो कोई जीतता है और न ही कोई हारता है।

इस होली की एक खास कड़ी ये भी है कि इसमें अगर पुरुष अपने आप को बचाने में नाकाम साबित हो जाते हैं तो फिर उन्हें महिलाओं की तरह साड़ी पहननी होती है और उन्हीं की तरह नाचना भी पड़ता है।

इस होली का अपना ही मजा है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान कृष्ण को भी गोपियों के आगे हार माननी पड़ी थी और औरत बन नाचना भी पड़ा था।

बरसाना में होली खेलने का दौर अभी से जारी है। महिलाएं, पुरुष और बच्चे सभी इस खेल में अपने आप को वक्त से पहले ही सराबोर कर चुके हैं।

इस होली का आनंद उठाने लोग दूर दराज के शहरों और देशों से आते हैं। विदेशियों का एक बड़ा तबका इस होली का लुत्फ उठाने पहुंचता है।

एक दूसरे पर रंग और गुलाल डालते हुए लोकगीत गाना बहुत जरुरी समझा जाता है। लोग राधा कृष्ण बन कर उन्हीं दोनों की तरह बात भी करते हैं।

बरसाने की होली का रंग चढ़ने के बाद बारी आती है नंदगांव, गोकुल, वृदांवन आदि जगहों पर होली मनाने की। लोग इधर भी सुबह से लेकर शाम तक बस लाल, पीले, नीले, गुलाबी और न जाने कितने रंगों में डूबे हुए नजर आते हैं।

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