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एमएसपी में बढ़ोतरी के बावजूद संसद घरेंगे किसान

नई दिल्ली

केंद्र की मोदी सरकार ने बुधवार को धान की न्यूनतम कीमत को बढ़ाने का ऐलान करने के बावजूद खफा किसान संगठनों ने इसे नाकाफी बताते हुए चेतावनी दी है कि अक्टूबर माह में किसान ट्रैक्टर समेत संसद को घेरेंगे।

अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) ने धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 200 रुपए क्विंटल की वृद्धि के केन्द्र सरकार के फैसले को ऐतिहासिक विश्वासघात करार देते हुए इसे भाजपा नीत राजग सरकार द्वारा वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर किसानों की आंखों में धूल झोंकने के समान बताया है। एआईकेएस ने एक बयान में कहा कि यद्यपि मोदी और भाजपा ने भारी उम्मीदें जगाई थी और 2014 के चुनावों में किसानों का समर्थन प्राप्त करने के बाद उन्होंने किसानों को धोखा दिया। संगठन ने कहा कि सरकार ने स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों के मुताबिक सी2+50 प्रतिशत फॉर्मूला के मुताबिक एमएसपी तय करने का वादा किया था लेकिन उन्होंने ए2+एफएल लागतों के आधार पर एमएसपी की घोषणा की। जबकि उन्होंने अधिक व्यापक सी 2 लागत का वादा किया था।

स्वामीनाथन आयोग ने सुझाव दिया है कि एमएसपी को कृषि लागतों के व्यापक उपाय के आधार पर तय किया जाएगा जिसमें पूंजी की लागू लागत और जमीन पर किराए (जिसे सी2 कहा जाता है) और किसानों को 50 प्रतिशत लाभ दिया जाएगा, लेकिन उसके बजाय एक संकुचित उपाय के तहत किसानों को आई लागत और पारिवारिक श्रम (ए2+एफएल) को संज्ञान में लेने वाले फार्मूले को अपनाया गया है। एआईकेएस ने एक बयान में कहा भाजपा सरकार के चार साल किसानों के लिए कुछ भी किए बिना पूरे हो गए और वे होने वाले चुनावों के मौके पर आक्रामक अभियान चलाकर किसानों की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास कर रहे हैं।

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