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जितेंद्र दीक्षित को बहुत-बहुत श्रद्धांजलि….कहते हैं डूबते सूरज को कोई भी जल नहीं देता!

हते हैं वृद्धावस्था में घिर व्यक्ति जब अवसान की ओर होता है तो उसे बहुत कम लोग साथ देने वाले मिलते हैं।
हालांकि जितेंद्र दीक्षित जी अभी 60 वर्ष के ही थे परंतु शरीर में आई अर्थराइटिस और स्पोंडलाइटिस जैसी बीमारियों ने उन्हें उसी स्थिति में ला दिया था जहां वह आम जीवन से कट गए थे लोगों के कार्यक्रमों में नहीं जा पाते थे।
परंतु यह सब बातें पत्रकारिता की विराट वृक्ष रुपी शलाखा जितेंद्र दीक्षित जी के ऊपर फिट नहीं बैठती।
वह कुछ न कुछ लिखते रहते थे उन्होंने सोशल मीडिया को अपनी बात कहने का मंच बनाया।
कलम के धनी 1992 में मुजफ्फरनगर से अमरउजाला में कार्यरत होने वाले सीतापुर के भँभोरा गांव निवासी 60 वर्षीय पंडित जितेंद्र दीक्षित को श्रद्धांजलि देने से लें उनके अंतिम संस्कार तक इकट्ठा हुए लोगों की भारी भीड़ यह साफ करने के लिए काफी रही के व्यक्ति में सौम्यता, मिलनसारी, साफगोई, और सभी को एक नजरिए से देखने की क्षमता है तो सब उसे साथ, स्नेह, प्यार, आत्मीयता अंतिम समय तक देते हैं।
अंकित विहार में र ह रहे हैं जितेंद्र दीक्षि त जी को काफी लंबे समय से स्पॉन्डिलाइटिस था।वह बिस्तर से स्वयं हिलडुल भी नहीं सकते थे।जीवटता के धनी थे।उन्होंने कभी भी अपनी बीमारी को अपने चेहरे पर प्रदर्शित नहीं होने दिया।
उनमें जीवन जीने के प्रति गजब की ललक थी।वह जीवन को ऐसी हालत में भी अभिशाप नहीं मानते थे बल्कि उन्होंने उस में स्वयं को ढाल दिया था और जीवन का प्रत्येक अवस्था में आनंद ले रहे थे।
आज जब पत्रकारिता जगत के भीष्म स्वरूप और लम्बे समय तक अमर उजाला के मेरठ हेड कार्यलय में वरिष्ठ उप संपादक रहे जितेंद्र दीक्षित जी का अंतिम संस्कार हुआ तो शायद ही कोई व्यक्ति रहा हो जो उनके पीछे ना था।
मजबूरीवश कोई बाहर ही रह हो तो बात दूसरी है वरना बड़े बड़े चेहरे उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए उपस्थित थे। अगर राकेश टिकैत मौजूद थे किसानों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे तो विधायकों के प्रतिनिधि के रूप में कपिल देव भी मौजूद थे पत्रकारों के रूप में ऋषिराज राही मौजूद थे तो उत्तम चन्द शर्मा, कपिल सिकेरा, रविंद्र चौधरी, अरविंद भारद्वाज, विकास बालियान, कुलदीप उज्जवल, रणवीर सैनी, स्वराज सिंह, शरद गोयल सभी तो थे। सामाजिक चेहरों में उद्यमी में डॉ सुभाष शर्मा, सरदार सुदर्शन बेदी, यशपाल पंवार, भीमसेन कंसल से लेकर राजीव गर्ग, अरविंद राज शर्मा, गौरव स्वरूप तक मौजूद थे।
चिकित्सको में डॉ पंकज जैन, डॉ यूसी गौड़, डॉ आर बी सिंह मौजूद थे
पन्डतजीजी को अंतिम क्षणों तक पुत्रवत व्यवहार देने वाले और लगातार उनकी सेवा करने वाले पुत्र तुल्य राकेश शर्मा ने उन्हें मुखाग्नि दी।
एक तरह से कहें जितेंद्र जी जब चले तमाम लोग उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि देने के लिए उपस्थित थे।
आज के युग में ऐसा देखना बहुत मुश्किल है आज लोगों को चार कंधा देने वाले भी नहीं मिलते और जितेंद्र जी के पीछे जो कि अपने गृह जनपद में भी नहीं थे जो कि आज किसी पद पर नहीं थे जिन के वंश को चलाने के लिए पुत्र भी मौजूद नहीं था।
ऐसे व्यक्ति के पीछे हजारों लोगो का मौजूद रहना यह बताता है कि इंसान की कमाई वही है जो जितेंद्र दीक्षित जी ने की ।
असली कमाई इंसान को इंसान कमाना सीखना होगा।
पण्डितजी ने एक दिन कहा था विकास भाई आपके ग्रुप में अपने वेब पोर्टल का लिंक डाल रहा हूँ, किसी को परेशानी तो नही, आपसे बिना पूछे लिंक डाल दिये है।
हमने कहा था पण्डितजी सब कुछ कर लेते गैर तो न बनाते। आपने तो हक के रिश्ते तमाम कर दिए। पण्डितजी बोले भाई उम्मीद थी यही जवाब होगा।
जितेंद्र जी आशावादी थे, हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे।उनकी  याददाश्त, ज्ञान, मुद्दे और स्थिति को समझने की प्रवर्ति गज़ब थी।

पण्डितजी के परिवार में पत्नी श्रीमती कल्पना दीक्षित, दो विवाहित पुत्रियां कृति मिश्रा और स्मृति शुक्ला है।
पण्डितजी अपने जीवन के प्रत्येक आनन्द के क्षणों को फेसबुक पर डालते थे। नातीन, नातियो के संग बच्चे हो जाते थे।
पण्डितजी आपके परिजनों के साथ राकेश, पवन, हरेंद्र आदि भाइयो के साथ हम भी खड़े है।

आपका आशीर्वाद उस अनजान दुनिया से भी हम लोगो तक पहुंचेगा
जितेंद्र दीक्षित जी को बहुत-बहुत श्रद्धांजलि….
नमन….?????????????????

(विकास बालियान)

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