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कांग्रेस महाधिवेशन के लिए राहुल ने बनायी समितियां

नई दिल्ली ।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी के महाधिवेशन के लिए कई समितियों का गठन किया है। इसमें मसौदा समिति, आयोजन समिति और संविधान संशोधन समिति प्रमुख है। महाधिवेशन 16 से 18 मार्च तक दिल्ली में होना है।
कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी के अधिकृत बयान के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को मसौदा समिति का अध्यक्ष और मुकुल वासनिक को इसका संयोजक बनाया गया है। यह समिति महाधिवेशन का मसौदा तैयार करेगी। इस समिति में क्षेत्रीय संतुलन बनाते हुए 44 सदस्य शामिल किए गए हैं। आयोजन समिति का अध्यक्ष एआईसीसी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा को बनाया गया है। पार्टी के महासचिव ऑस्कर फर्नांडिस इसके संयोजक बनाए गए हैं। इस कमेटी में एआईसीसी के सभी 14 महासचिव, 9 आमंत्रित सदस्य और 6 प्रदेश प्रभारियों को शामिल किया गया है। संविधान संशोधन समिति का अध्यक्ष पार्टी महासचिव और यूपी प्रभारी गुलाम नबी आजाद को बनाया है। जर्नादन द्विवेदी इसके समन्वयक बनाए गए हैं। कमेटी में अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खडग़े, पी. चिदंबरम, कपिल सिब्बल समेत 10 वरिष्ठ नेता शामिल हैं।
इसके अलावा राजनीतिक, आर्थिक, अंतरराष्ट्रीय मामलों और कृषि एवं रोजगार पर चार उप समितियां भी बनायी गई हैं। वरिष्ठ नेता ए. के. एंटनी को राजनीतिक उप समिति का अध्यक्ष और कुमारी शैलजा को इसका संयोजक, पी. चिदंबरम को आॢथक मामलों की उप समिति का अध्यक्ष और जयराम रमेश को संयोजक, अंतरराष्ट्रीय मामलों से संबंधित उप समिति का अध्यक्ष आनन्द शर्मा और संयोजक ज्योतिरादित्य सिंधिया को बनाया गया है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र ङ्क्षसह हुड्डा को कृषि, रोजगार तथा गरीबी उन्मूलन संबंधी उप समिति का अध्यक्ष और मीनाक्षी नटराजन को संयोजक बनाया गया है।
कांग्रेस के लिए यह महाधिवेशन काफी अहम है। पिछले साल दिसंबर में राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद उनकी अगुवाई में पार्टी का यह पहला महाधिवेशन है। इसमें उनकी नियुक्ति पर मुहर लगनी है। वहीं इस साल देश के नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसमें से कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ सबसे प्रमुख है। कर्नाटक में कांग्रेस की अपनी सरकार है, जिसे बनाए रखने की उसके सामने बड़ी चुनौती है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस को उम्मीद है कि भाजपा सरकारों के खिलाफ बने सत्ता विरोधी लहर का उसे फायदा मिल सकता है। महाधिवेशन में इन विधानसभा चुनावों के विभिन्न संभावनाओं पर विचार-विमर्श होना तय माना जा रहा है।

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