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काल भैरव जयंती 19 को जानिए क्या है महत्व?-आचार्य गौरव आर्य

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आचार्य गौरव आर्य बताते है की भैरव जयंती इस साल 19 नवंबर को मनाई जायेगी। इस दिन भगवान शिव के स्वरूप काल भैरव की मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव के इस रूप की उपासना करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है और मृत्यु के बाद शिवलोक की प्राप्ति होती है। इस दिन भैरव बाबा के मंदिर में शराब चढ़ाई जाती है जो इनका प्रिय प्रसाद माना जाता है। काल भैरव की कृपा से राहु का प्रकोप भी शांत हो जाता है। जानिए इस दिन का महत्व और

काल भैरव जयंती मुहूर्त

कालभैरव जयन्ती मंगलवार, नवम्बर 19, 2019 को अष्टमी तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 19, 2019 को03:35 पी एम बजे अष्टमी तिथि समाप्त – नवम्बर 20, 2019 को01:41 पी एम बजे
कुछ विशेष

आचार्य गौरव आर्य बताते है की इसे भैरवाष्टमी, भैरव जयंती, काल-भैरव अष्टमी और काल-भैरव जयंती के रूप में भी जाना जाता है। भैरव जी की पूजा विशेष रूप से सफलता, धन, स्वास्थ्य और बाधा दूर करने के लिए की जाती है। भक्त को भैरव अष्टमी का व्रत करने से पाप और मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है।भैरवाष्टमी के दिन व्रत और पूजा उपासना करने से शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों का नाश हो जाता है। इस दिन भैरव बाबा की विशेष पूजा अर्चना करने से सभी तरह के पाप भी धूल जाते हैं। इस तिथि पर श्री कालभैरव जी का दर्शन- पूजन करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
क्या विशेष करे इस दिन
गन्ने के रस का भोग देने से पितृ संकट टल जाते है।

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