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क्यों होती है पेट मे एसिडिटी-गैस-अफारा ?.इनका इलाज क्या है-बता रहे है डीएम कार्डियोलॉजी डॉ अनुभव सिंघल

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मुजफ्फरनगर। पेट मे एसिडिटी-गैस-अफारा आदि को  छाती के एकदम नीचे पेट (कलेजा) मे जलन, दुखन, दबाने से दर्द, खट्टी-खट्टी डकारो को एसिड पेप्टिक डिज़ीज़/एपीडी/गैस्ट्राइटि्स/ पेप्टिक-अल्सर जैसे कई नामों से जाना जाता है।

पेट में तेजाब कैसे?  हमारे फूड पाइप की अंदर की दीवारें विभिन्न कारणों से छिल सी जाती हैं (गैस्ट्राइटिस) या उनमें कुछ अल्सर (छाले) बन जाते हैं।जिससे आमाशय मे खाना पचाने के लिए नॉर्मली बनने वाला एसिड, पेट में दर्द /उबकाई करता है एवं कई बार तो मुंह में खट्टा पानी भी आ जाता है (जीईआरडी-गेस्ट्रो इसोफिजीएल रिफ्लक्स डिजीज.एसिडिटी होने के क्या कारण हैं?  दुश्मन नंबर एक- दर्द निवारक गोलियां। जैसे ब्रूफेन , कॉम्बिफ्लेम, फ्लेक्स, नाइस, वोवरोन , मेफटाल, डोलोनेक्स, इंडोकैप, डिक्लोफिनेक, एसिक्लोफिनेक, डिस्प्रिन इत्यादि जाने अनजाने में ली गई पेन-किलर्स गोलियां। इन दवाइयों को मरीज कई बार खुद ही मेडिकल स्टोर से या फिर किसी बीमारी के दौरान जैसे दांत-दर्द, सिर- दर्द(माइग्रेन), घुटने में दर्द(आर्थराइटिस), कमर-दर्द (डिस्क या शियाटिका) गठिया-बाय (रूमेटोय्ड), सर्वाइकल, बुखार मे ज्यादातर छोटे-मोटे डॉक्टरों की सलाह पर ले लेते हैं। कई बार तो लोकल पुडिया टाइप में दी जाने वाली एक या दो डोज़ में ही ये दवाईयां सीवियर एसिडिटी कर मरीज की हालत खराब कर देती है।

दर्द की गोलियों के अलावा अन्य क्या कारण है एसिड के? कई प्रकार की एंटीबायोटिक्स, स्टिरॉइड्स (व्हाईसोलोन, ओम्नाकोर्टिल इत्यादि), थायराइड की गोलियां, विटामिंस एवं ताकत की दवाइयां भी पेट में तेजाब बनाती हैं। दवाइयों के अलावा ज्यादा तला भुना, ऑयली, तेज मिर्च मसाले वाला चटपटा स्पाइसी खाना, अंडा, नॉन वेज- चिकन, मीट, चाय-कॉफी, सिगरेट, शराब, पान- मसाला, तंबाकू एवं ज्यादा मानसिक तनाव से भी पेट में एसिडिटी होती है।

एसिडिटी कैसे बचें?  दर्द निवारक गोलियां लेने में सावधानी बरतें, इन्हें कम से कम समय एवं मात्रा में ही लें। खुद ही या छोटे-मोटे डॉक्टरों से जहां तक हो दवा न ले, नहीं तो बाद में तकलीफ के साथ-साथ एक के दो पैसे देने पड़ते हैं।

दर्द निवारक दवाइयां जिन्हें एनेसेड्स कहा जाता है- दर्द में तो बहुत अच्छा काम करती हैं परंतु पेट की अच्छी तरह बैंड बजा देती हैं एवं पेट में अल्सर बनाकर ब्लीडिंग भी कर सकती हैं। जिससे काले रंग की लैट्रिन आने लगती है एवं खून (हिमोग्लोबिन-एचबी) भी कम हो जाता है।

एसिडिटी का क्या इलाज है?  सभी प्रकार की गैर जरूरी दवाइयां विशेषतः दर्द की गोलियां बंद कर दें।ऑइली स्पाइसी मिर्च मसाले वाला खाना, उड़द की दाल, नानवेज – अल्कोहल, चाय-कॉफी बंद कर दे। ठंडा दूध, अनार – मौसमी का रस, अंगूर, पेठ्ठा, चावल, खीर, सत्तू इत्यादि लेना चाहिए। तत्काल लाभ के लिए गुनगुने पानी में नींबू डालकर घूंट-घूंट करके पीएं। सुबह शाम भोजन के बाद लोंग चूसने से भी आराम पड़ता है। गैस के लिए मट्ठे में अजवाइन और काला नमक डालकर दोपहर में पिएं। इन घरेलू उपचार एवं परहेज से भी आराम न हो तो सुबह खाली पेट ओमी- प्रजोल/ रेबी-प्राजोल/पेंटो-प्रजोल, जिंटैक/एसिलोक इत्यादि कैप्सूल एवं गोलियां लेनी चाहिए। एसिडिटी की शीशियां जैसे डाइजीन/म्यूकेन इत्यादि से भी तात्कालिक आराम पहुंचता है।

पेट मे अफारा ?  कुछ लोगों को खाना खाते ही पेट में गैस सी/अफारा सा बनता है या बार बार टॉयलेट जाने के बाद भी पेट साफ ना होने की फीलिंग होती है। ज्यादातर इन लोगों को ‘इर्रिटेबल बॉवेल सिंड्रोम’ कहा जाता है। यह दिक्कत आतों के नियमित पेरीस्टाल्सिस (ऊपर से नीचे की तरफ एक तरंग में आंतों का फूलना एवं पिचकना) की गड़बड़ी से होती है। यह एक मानसिक तनाव/ स्ट्रेस का लक्षण है। जो लोग छोटी छोटी बातों से जल्दी परेशान हो जाते हैं (टाइप-‘ए’ पर्सनालिटी), उन्हें ऐसा ज्यादा होता है।

गैस/अफारा का इलाज क्या? खाने में रेशेदार सब्जियां, दही, केले लेने, मेंटल रिलैक्सेशन, ध्यान, योग करने, चाय-कॉफी कम करने एवं कुछ नोर्मेक्सिन/ओमीप्रजो़ल टाइप की गोली/कैप्सूल खाने से धीरे-धीरे आराम पड़ जाता है।

डॉ अनुभव सिंघल,

एमडी मेडिसिन (गोल्ड-मेडल) ,

डीएम कार्डियोलॉजी (एसजीपीजीआई, लखनऊ)

 

 

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