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चुनाव तैयारियों की धीमी रफ्तार से राजस्थान कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में बेचैनी

जयपुर।

राजस्थान में विधानसभा चुनाव में महज छह माह का वक्त बचा है, लेकिन राज्य में कांग्रेस संगठन और चुनाव की रणनीति को लेकर हाईकमान की धीमी रफ्तार से कार्यकर्ताओं में बेचैनी का माहौल है। कार्यकर्ताओं के बीच इस बात को लेकर भी चर्चाएं हैं कि पार्टी में धड़ेबन्दी इस कदर है कि हाईकमान कोई निर्णय नहीं कर पा रहा है।

राजस्थान के साथ ही मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं. मध्य प्रदेश में वरिष्ठ नेता कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के साथ ही हाईकमान ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव अभियान समिति का प्रमुख और दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह को समन्वय समिति का प्रमुख बना दिया। इसके साथ ही जातिगत समीकरणों को साधते हुए चार कार्यकारी अध्यक्ष, मैनीफेस्टो कमेटी, चुनाव रणनीति समिति, अनुशासन समिति और मीडिया कमेटी का भी गठन कर दिया।

मध्य प्रदेश की तरह राजस्थान की कांग्रेस भी गुटों में बंटी है। पूर्व मुख्यमंत्री और एआईसीसी के महासचिव संगठन अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सीपी जोशी एकजुट नहीं दिखते और इसे लेकर कांग्रेस का कार्यकर्ता भी असमंजस की स्थिति में है। इसका असर प्रदेश कांग्रेस के मेरा बूथ मेरा गौरव कार्यक्रम पर भी दिखने लगा है। शुरुआती दौर में जहां इस कार्यक्रम में कार्यकर्ता बड़े उत्साह के साथ हिस्सा ले रहे थे, वहीं अब यह फ्लाप साबित होता नजर आने लगा है। पिछले दिनों भरतपुर में हुए कार्यक्रम में तो स्थिति ऐसी बन गई कि मुट्ठीभर कार्यकर्ता ही जुट पाए। अब तो प्रदेश कांग्रेस जल्द से जल्द इस कार्यक्रम की खानापूर्ति में जुटी है।

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