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झोले में चल रहे प्रकाशनों पर गिरेगी गाज, रिकॉर्ड जमा कराने को मिला दो हफ्ते का समय

लखनऊ।

प्रदेश में ऐसे समाचार पत्रों और पत्रिकाओं पर गाज गिरने वाली है जिन्होंने लंबे समय से अपने प्रकाशन की एक प्रति जिला सूचना कार्यालयों में नियमानुसार जमा नहीं कराई है। ऐसे प्रकाशनों का प्रदेश भर में सत्यापन चल रहा है। अब उन्हें दो हफ्ते का अंतिम अवसर दिया गया है जिसमें उन्हें अपने प्रकाशन की प्रतियां जमा करानी होगीं। अकेले राज्य की राजधानी लखनऊ में 3629 ऐसे प्रकाशक हैं जिनके प्रकाशन की प्रतियां अर्से से सूचना कार्यालय में जमा ही नहीं कराई गई हैं।

सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के सचिव के निर्देशानुसार गैर विद्यमान समाचार पत्रों/पत्रिकाओं के प्रकाशन का प्रदेश भर में सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन रिपोर्ट 31 मार्च तक पीआरबी को भेज दी जाएगी। ऐसे सभी प्रकाशनों का घोषणापत्र निरस्त हो जाएगा, जिनके प्रकाशन की प्रतियां सूचना कार्यालय में जमा नहीं हैं। ऐसे प्रकाशनों को अपने प्रकाशन की पहली प्रति और बीते छह महीने की प्रतियां जिला सूचना कार्यालय में दो सप्ताह की अवधि में जमा करानी होगीं।

राज्य की राजधानी लखनऊ की बात करें तो यहां 3629 प्रकाशकों की प्रतियों का अता-पता नही है। लखनऊ के उप सूचना निदेशक डॉ. दीवान सिंह यादव ने जानकारी दी कि RNI की वेबसाइट के अनुसार लखनऊ में हिंदी/उर्दू व अंगरेजी में 5676 प्रकाशक पंजीकृत हैं जिनमें 3629 प्रकाशक सूचना विभाग में अपने प्रकाशन की प्रति ही नहीं जमा करा रहे हैं। ऐसे प्रकाशनों की नियमितता और अनियमितता का कोई रिकार्ड राज्य सूचना निदेशालय को नहीं भेजा जा पा रहा है।

जाहिर है दो सप्ताह की अवधि में जो प्रकाशक प्रतियां नहीं जमा करा सकेंगे उनके घोषणापत्र निरस्त हो सकते हैं।

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