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तब हुड्डा के थे खास, अब भाजपा से राज्यसभा जाने का रास्ता साफ

चंडीगढ़। (धीरेश सैनी) ।

लगभग अंतिम समय तक सस्पेंस बनाए रखने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने लेफ्टिनेंटको हरियाणा से राज्यसभा प्रत्याशी घोषित किया है। हरियाणा विधानसभा में भाजपा विधायकों के संख्या बल के आधार पर उनके राज्यसभा पहुंचने में कोई अडचन नहीं है। दरअसल विपक्ष के पास इस चुनाव के लिए पर्याप्त आंकड़ा ही नहीं है और वत्स के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ है।
दिलचस्प बात यह है कि डीपी (देवेंद्र पाल) वत्स और उनके भाई एसपी वत्स हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में उनके नजदीक बने हुए थे। हुड्डा सरकार में डीपी वत्स हरियाणा लोक सेवा आयोग के चेयरमैन थे और उनके भाई एसपी वत्स महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार थे। हुड्डा सरकार जाते-जाते वत्स की राजनीतिक निष्ठा में परिवर्तन दिखाई देने लगा था। उन्होंने अगस्त 2014 में भाजपा में शामिल होने की घोषणा कर दी थी। मोहन भागवत रोहतक में तरुणोदय शिविर में आए थे तो डीपी वत्स भी समापन समारोह में उपस्थित रहे थे। डीपी वत्स खाप पंचायतों में भी सक्रिय रहे हैं।

डीपी वत्स का जन्म 16 अप्रैल 1950 को हिसार जिले के नारनौंद क्षेत्र के थुराना गांव में हुआ। वे पुणे स्थित प्रतिष्ठित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (AFMC) के कमांडेट और डायरेक्टर रहे हैं। उन्होंने अपनी मेडिकल की पढ़ाई रोहतक पीजीआईएमएस से की और 1975 में इंडियन आर्मी जॉइन की। उन्हें 2011 में परम विशिष्ट सेवा पदक मिला। उन्हें सेना पदक, विशिष्ट सेना पदक सहित कई आंय सम्मान हासिल हैं।
इन दिनों वे अग्रोहा स्थित मेडिकल कॉलेज के नेत्र चिकित्सा विभाग के प्रमुख हैं।

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