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तारीख गवाह है, जितेंद्र दीक्षित हमारे बीच नहीं हैं

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मुजफ्फरनगर।
कुछ तारीखें ऐसी होती हैं, जो आजीवन भुलाए नहीं भूलतीं। ऐसी ही तारीख है 15 मार्च। ठीक एक साल पहले 2018 की इसी तारीख को ‘असल बात’ न्यूज पोर्टल के संस्थापक संपादक जितेंद्र दीक्षित हमें छोड़ कर इस दुनिया से चले गए थे। उस वक्त यह न्यूज पोर्टल विधिवत रूप से शुरू भी नहीं हुआ था। अपनी मृत्यु से पखवाड़ा भर पहले ही उन्होंने इसकी शुरुआत की थी और तेजी से यह ट्रेंड भी होने लगा था। उनकी धारदार लेखनी ने देखते ही देखते इस न्यूज पोर्टल को हजारों लोगों की पसंद बना दिया। लोग उनकी लेखनी के कायल पहले भी थे। दीक्षित जी अमर उजाला के मुजफ्फरनगर प्रभारी के तौर पर रहे हों या फिर मेरठ में अलग-अलग पदों पर रहते हुए लिखते रहे हों, लोग उनके लिखे को पढ़ना चाहते थे और उनकी निर्भीक बेबाक टिप्पणियों को पसंद भी करते थे। सेवानिवृत्ति के दो साल के अंतराल के बाद जब उन्होंने ‘असल बात’ न्यूज पोर्टल को आकार देना शुरू किया था तो काफी उत्साहित थे। सुबह नींद खुलने के साथ ही वे ‘असल बात’ पर खबरें देना शुरू कर देते और सोने से पहले पोर्टल को अपडेट करके ही बिस्तर पर जाते। अंतिम सांस लेने से कुछ घंटे पहले भी अस्पताल से उन्होंने खबरें अपडेट करवाई थी। अपने पेशे के प्रति प्रतिबद्ध ऐसे पत्रकार का हमारे बीच से चले जाना न केवल पत्रकारिता और ‘असल बात’ न्यूज पोर्टल बल्कि समाज के लिए भी अपूर्णीय क्षति है। यह उनके जाने का वक्त नहीं था। समाज को उनसे अभी बहुत कुछ मिल सकता था, लेकिन शायद काल को कुछ और मंजूर था। या यूं भी कहें कि नियती ने शायद मान लिया था कि इस संसार में वे अपने हिस्से का हर काम पूरा कर चुके थे। तारीख गवाह है,दीक्षित जी हमारे बीच नहीं हैं। उनके काम और उनकी यादें ही हमारे साथ हैं।…

विनम्र श्रद्धांजलि…

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