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बेटे ने छोड़ा साथ तो बहू बन गई बेटा, ससुर की अर्थी को दिया कंधा

करनाल।

पुत्र ने दूसरी महिला के चक्कर में पिता से किनारा कर लिया, लेकिन पुत्रवधू ने ससुर की बेटे की तरह सेवा कर रिश्तों की दिल छू लेने वाली कहानी लिख दी। करनाल की यह घटना देश की पहली घटना होगी कि पुत्रवधू ने ससुर की अर्थी को कंधा दिया, मुखाग्नि दी। अब अस्थियों के विर्सजन और रस्म पगड़ी की तैयारी कर रही है।

करनाल के न्यू चार चमन निवासी नीतू अरोड़ा अपने ससुर मंगतराम की पिछले दस वर्ष से सेवा सुश्रूषा कर रही थीं। वजह यह थी कि मंगतराम का इकलौता बेटा और नीतू का पति हर्षदीप अपने पिता, पत्नी और दो बेटियों को छोड़कर दूसरी महिला के साथ रहने चला गया। नीतू ने तय किया वह बुजुर्ग को अकेला और निराश्रित छोड़कर नहीं जाएगी। वहीं रहेगी। उनके साथ। बेटा बन कर। वह अपनी दो बेटियों के साथ बुजुर्ग ससुर के साथ ही रहीं।

अपने ससुर के लिए वह बेटा बन गईं। 80 वर्षीय बुजुर्ग ससुर मंगतराम का गत दिवस लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। अर्थी उठाते समय नीतू खुद आगे आई और ससुर की अर्थी को कंधा दिया। पिता तुल्य ससुर के चले जाने से वह गमजदा थीं। आंखों में आंसू थे, लेकिन वह पूरी मजबूती से अर्थी को लेकर श्मशान घाट पहुंची। उन्हें मुखाग्नि दी और अंतिम संस्कार की हर परंपरा निभाई।

स्वर्गीय मंगतराम का बेटा हर्षदीप जब दूसरी महिला के लिए घर छोड़ गया तो मंगतराम ने भी उससे अपने कुल के दीप का हक छीन लिया। उन्होंने बेटे को बेदखल कर दिया और अपनी सारी संपत्ति अपनी पुत्रवधू व अपनी दो पोतियों के नाम कर दी। इतना ही नहीं उन्होंने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अपने निधन के बाद मुखाग्नि का अधिकार भी अपनी पुत्रवधू को ही दिया, जिसे नीतू ने पूरा किया।

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