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भाजपा जिला कार्यकारिणी में पदाधिकारियों की नियुक्ति बनी पार्टी के गले की फांस, जिलाध्यक्ष ने अपने ही पत्रों को बताया फर्जी

मुजफ्फरनगर ।

मुजफ्फरनगर । भारतीय जनता पार्टी की जिला कार्यकारिणी में दो नए पदधिकारियों का मनोनयन अब पार्टी के गले की फांस बन गया है। हालांकि जिलाध्यक्ष ने यूटर्न लेते हुए दोनों पदाधिकारियों के मनोनयन का खंडन करते हुए अपने द्वारा जारी पत्र को ही नकार दिया।

अशोक सिंघल
सुधीर खटीक

 लेकिन पार्टी में इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि आखिर ऐसे क्या हालात बने कि जिलाध्यक्ष को दोनों मनोनयन रद्द करने पड़े। इसके पीछे जिलाध्यक्ष को पार्टी संगठन की डांट एक वजह बताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक 25 मार्च को भाजपा के जिलाध्यक्ष रुपेन्द्र सैनी ने कल्याणपुरी (नई मंडी) निवासी सचिन सिंघल को पार्टी का जिला उपाध्यक्ष तथा लद्दावाला निवासी सुधीर खटीक को पार्टी का जिला मंत्री मनोनीत किया था। इसके लिए दोनों लोगों को जिलाध्यक्ष के लैटर पैड पर उनके हस्ताक्षर से मनोनयन पत्र भी जारी कर दिया गया था। जिसके बाद दोनों नेेताओ के अपने समर्थकों में लड्डू बांटे व खुशियां मनाई। लेकिन उनकी ये खुशी एक दिन भी न टिक सकी। आज जिलाध्यक्ष रुपेन्द्र सैनी ने घोषणा की कि उन्होंने न कोई मनोनयन किया और न ही कोई पत्र जारी किया। जबकि जिलाध्यक्ष के दोनों मनोनयन पत्र मीडिया के पास मौजूद है।

इस मामले को नया रुप देते हुए आज जिलाध्यक्ष ने जो बयान जारी किया उसमें उन्होंने बताया कि प्रदेश व क्षेत्रीय नेतृत्व के अनुसार कोई कार्यकारिणी का विस्तार, पुनर्गठन नहीं हुआ है और न ही किसी पदाधिकारी की कोई घोषणा की गई है।
जिलाध्यक्ष द्वारा दो ही दिन में यूटर्न लेने के पीछे कई कयास लगाए जा रहे है। बताया जा रहा है कि इन मनोनयनों में जिलाध्यक्ष ने अपनी मनमानी दिखाई। यहां तक कि उन्होंने इसकी सूचना क्षेत्रीय अध्यक्ष तक को नहीं दी। जबकि भाजपा में कोई भी नियुक्ति के लिए एक चैनल बना है जिसमें जिलाध्यक्ष की संस्तुति पर क्षेत्रीय अध्यक्ष इसे प्रदेश अध्यक्ष का अग्रसारित करते है और प्रदेश अध्यक्ष स्तर से ही किसी जिला पदाधिकारी की नियुक्ति को हरी झंड़ी मिलती है।

जिलाध्यक्ष द्वारा हड़बड़ी में उठाए इस कदम से न सिर्फ पार्टी की किरकिरी हुई बल्कि अब कार्यकर्ताओं में भी असंतोष की स्थिति बन गई है।
ये भी बताया जा रहा है कि कुल दो महीने पहले भाजपा ज्वाइन करने वाले एक चर्चित व्यापारी को भी इसी तरह बिना अनुमोदन के जिला कार्यकारिणी में पदाधिकारी बनाया गया था और नगर पालिका में मनोनीत सभासद के लिए ये कतार में है। बिना अनुमोदन के नियुक्ति का ये मामला भी अब उभरकर सामने आ गया और इस पदाधिकारी पर भी गाज गिर सकती है।

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