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महंगाई पर नियंत्रण करने को सरकार ने कसी कमर, आज केंद्र और राज्य के मंत्री बनाएंगे रणनीति

नई दिल्ली

नई दिल्ली में 29 जून को खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले के प्रभारी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मंत्रियों की चैथी राष्ट्रीय परामर्श बैठक आयोजित की जा रही है। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय उपभोक्ता मामलों और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान करेंगे। इस बैठक में बढ़ती महंगाई के मद्देनजर कालाबाजारी के खिलाफ ठोस कदम उठाने पर विचार होगा, ताकि रसोई से लेकर रोजमर्रा की जरूरत वाली वस्तुओं के दाम काबू करने में मदद मिल सके।

मंत्रालय के अनुसार इस बैठक में राज्यों के संबन्धित मंत्रियों एवं प्रतिनिधियों के अलावा, केंद्रीय कृषि मंत्रालय, कृषि, रसायन और उर्वरक, वाणिज्य और उद्योग, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस और वस्त्रों के साथ आवश्यक वस्तुओं से निपटने वाले केंद्रीय मंत्रालय भी इसमें भाग लेंगे। परामर्श उपभोक्ता संरक्षण और कल्याण के विभिन्न पहलुओं को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक उपायों पर होगा, जिसमें स्थिर कीमतों, सार्वजनिक वितरण प्रणाली आदि पर आवश्यक खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता, और भविष्य के कार्यवाही का चार्ट शामिल है। इस बैठक में उपभोक्ता एवं खाद्य मामलों के मंत्री रामविलास पासवान, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु, संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार और कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी बैठक में शामिल होंगे। वहींु उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, बिहार, झारखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ समेत अन्य राज्यों के खाद्य व उपभोक्ता मामलों के मंत्री इसमें शामिल होंगे। उनसे जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम पर काबू रखने को केंद्र केंद्र सख्त और समुचित नीति पर विचार-विमर्श करेगा। कालाबाजारी पर प्रभावी तौर पर अंकुश लगाने के लिए इसमें राज्य के मंत्रियों से राय ली जाएगी। साथ ही उनसे आपूर्ति की निरतंरता के लिए निगरानी व्यवस्था लागू करने पर चर्चा होगी। इस बैठक में नई नीति को अंतिम रूप देकर इसे निर्धारित तिथि से लागू करने की घोषणा की जा सकती है।

महंगाई पर काबू करने पर चर्चा

माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ने से देश की थोक व खुदरा मूल्य सूचकांक पर हुए प्रभाव से सरकार हरकत में आ गई है। उसने महंगाई को काबू में करने के तमाम पहलुओं पर राज्यों के साथ चर्चा कर कमर कसेगी। मई में खुदरा महंगाई दर 4.87 प्रतिशत दर्ज हुई है। यह लगातार सातवें महीने 4 फीसद से अधिक है। रिजर्व बैंक ने इसके 2 प्रतिशत घटने-बढ़ने की संभावना के साथ 4 प्रतिशत के दायरे में रखने लक्ष्य रखा है। ऐसे में सरकार सब्जियों, दूध, दालों और अनाज के दाम को काबू में रखने के लिए कालाबाजारी समेत अन्य गतिविधियों पर अंकुश लगाने का निर्णय लिया है। उपभोक्ता मंत्रालय के मुताबिक सरकार का इरादा दरों को संतुलित रखने का है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों के बढ़ने का ज्यादा असर महंगाई पर नहीं है, बल्कि अन्य ऐसे तमाम कारक है जिनके चलते आम जनता को महंगी चीजों की खरीद करनी पड़ती है। इस पर अंकुश लगाना सरकार की प्राथमिकता है और 29 जून को राज्य सरकारों के मंत्रियों के साथ इस पर बैठक की जाएगी।

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