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मुस्कान के पीछे छुपा दर्द…जूझती-थरथराती लौ को हिफाज़त की दरकार, जीप ड्राइवर लड़की के संघर्ष की दास्तां

किसी की मुस्कान के पीछे इतना दर्द छिपा हो सकता है यह मैंने आज देखा। फोटो में दिखाई देने वाली लड़की राजेश कुमारी है। मुज़फ्फर नगर के गाँव सराय रसूलपुर की रहने वाली है। महज तीस वर्षीय इस लड़की ने अपने जीवन में कितने कड़वे अनुभव लिए हैं और कितना संघर्ष कर जीवन और परिवार की गाड़ी को अकेले खींच रही है; इसके बारे में जाने तो आदमी दर्द से कराह उठे। परिवार में बूढ़े बीमार पिता है, एक ब्लाइंड बड़ा भाई है। भाभी है और पाँच छोटे-छोटे भाई भतीजे हैं। बगैर माँ की राजेश अकेले सबकी बीमारी और आजीविका का भार संभाले हुए है। कार्य के रूप में यह लड़की हाइवे रोड पर मुज़फ्फर नगर से खतौली(करीब 25 किमी) के बीच पिछले बारह वर्षों से किराये की सवारी जीप चला रही है। जीप चलाने में सिद्धहस्त यह लड़की जीवन की गाड़ी को बामुश्किल धकेल रही है क्योंकि दिनभर जोखिम भरा कार्य करके यह जितना कमा पाती है उससे परिवार का भरपूर भरण-पोषण नहीं हो पाता। ऊपर से पिता की बीमारी का खर्च । और तो और यह लड़की खुद भी ब्रेस्ट संबंधी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, जिसका यथासमय इलाज होना भी अनिवार्य है, किंतु समय और आर्थिक स्थिति उसे अपने इलाज की मोहलत नहीं देती है और बीमार राजेश पूरे-पूरे दिन भूखी-छकी रहकर जीप चलाने को मजबूर है।
आज सुबह मास्टर विजय सिंह के धरने पर राजेश से मुलाक़ात हुई तो पहले की बनिस्पत आज उसके बारे में अधिक जानने को मिला। आज जाना कि यह भोली और मासूम गांव की लड़की कितने साहस और अदम्य जीजिविषा का प्रतीक है। हालांकि उससे बात करते हुए यह भी देखा की किस तरह बार-बार उसके सब्र का बांध टूट रहा था और किस तरह वह बार-बार आँखों की सीमा लाँघ रहे आंसूओं को पोंछ-पोंछकर मुस्कराने की असफल कोशिश कर रही थी। हालाँकि आँसू आँखों से दौड़-दौड़कर उसकी कहानी कह रहे थे। उसकी लगभग याचना भरी बातें, संकोच और चेहरे पर बार-बार उभरती दीन मुस्कान उसके जीवन में व्याप्त त्रासदी को बड़ी बेबाकी से बयान कर रही थी। राजेश आज जिला मजिस्ट्रेट से मिलने कचहरी आयी थी। डी. एम. साहब भी उसकी दारुण दशा को सुनकर पिघल गये और उन्होंने उसे यथाशीघ्र नौकरी दिलवाने और उसके इलाज का उचित प्रबंध करवाने का आश्वासन दिया। उम्मीद है कि डी.एम. साहब का यह उदार प्रयास इस नन्ही जान को मुसीबत की दलदल से निकालने में कामयाब होगा।
अमित धर्म सिंह की एफबी वॉल से साभार।
 

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