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राष्ट्रोदय कार्यक्रम में मोहन भागवत का संबोधन : जातिवाद के जहर को हिंदुत्व स्वाभिमान की धार से काटने का मंत्र

मेरठ।

संघ प्रमुख मोहन भागवत रविवार को क्रांतिधरा मेरठ पर अपने लाखों स्वयंसेवकों को जातिवाद के जहर को हिंदुत्व स्वाभिमान की धार से काटने का मंत्र दे गये। सांस्कृतिक संगठन की मर्यादा में रहते हुए भागवत ने कोई स्पष्ट राजनीतिक संदेश तो नहीं दिया पर पूरे आयोजन की रचना कहीं न कहीं मिशन 2019 को ही केंद्र में रख कर की गई है। रविवार को जागृति विहार एक्सटेंशन के 650 एकड मैदान में संपन्न हुए संघ के राष्ट्रोदय कार्यक्रम में लगभग सवा तीन लाख पूर्ण गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने भाग लिया।
संघ इतिहास के सबसे बडे इस एकत्रीकरण में मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल के महानगरी इलाकों से 93, 364 और ग्रामीण इलाके के 2, 18, 214 स्वयंसेवक शामिल हुए। आयु वर्ग की बात करें तो 40 वर्ष से कम आयु के 2, 22, 791 स्वयंसेवक जबकि इससे अधिक आयु के लगभग 88, 787 स्वयंसेवक थे। सबसे अधिक संख्या छात्रों की थी। इस बार ग्रामीण इलाकों से लोगों को कार्यक्रम में लाने पर खास जोर था। तीन मंडलों की शायद ही कोई ग्राम सभा बची हो जहां से स्वयंसेवक ना आया हो। राजनीतिक रूप से पश्चिमी यूपी में लगातार ध्रुवीकरण चल रहा है। 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे के बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में हिंदू भाजपा के पक्ष में पूरी तरह गोलबंद हुए थे। यही समीकरण बीते बरस विधानसभा चुनाव में भी जारी रहा था। भाजपा की आंधी में सपा और बसपा जैसी जाति आधारित पार्टियों का सफाया हो गया था।
इस बीच सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में हुए दलित-ठाकुर टकराव और भीम आर्मी के वजूद में आने और उसका विस्तार होने से हिंदुत्व के नाम पर मतदाताओं की गोलबंदी बिखरने की नौबत आ चुकी है। संघ को अच्छी तरह पता है कि 2019 के संसदीय चुनाव में विपक्षी दल गोलबंदी कर चुनौती देंगे। वही शहरी मध्यवर्ग में नोटबंदी और जीएसटी को लेकर चल रहा असंतोष भी संघ विचार की भाजपा के दोबारा सत्तावापसी में बडी बाधा बन सकता है। इन्ही सारी चुनौतियों के मद्देनजर संघ ने हिंदुत्व का स्वाभिमान जागृत करने की दिशा में राष्ट्रोदय आयोजन को माध्यम बनाया है। भागवत ने जोर देकर कहा कि हिंदू जात-पात की लडाई करते हैं जिससे निहित स्वार्थी तत्व लोगों को उकसा कर अपनी रोटियां सेंकते हैं। उन्होने संपूर्ण समाज को संघ से जोडने और अपनी शक्ति के अनुसार लक्ष्य निर्धारित करने को कहा। कुल मिला कर कोई राजनीतिक बात न कहते हुए भी उन्होने स्वयंसेवकों को बडा संदेश दे दिया।

 

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