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राष्ट्रोदय कार्यक्रम: मोहन भागवत का आह्वान : संपूर्ण समाज को संघ से जोड़े

मेरठ ।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों से संपूर्ण समाज को संघ कार्य से प्रत्यक्ष रूप से जोड कर स्वयंसेवक बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शक्ति प्रदर्शन का विषय नहीं बल्कि अपनी क्षमताओं का आकलन कर भविष्य के लक्ष्य तय करने के लिए शक्ति प्रदर्शन होना चाहिए। भागवत ने कहा कि स्वधर्म की जागृति जरूरी है और इसके लिए गर्व जागृत करना चाहिए। संघ प्रमुख ने जाति, पंथ, क्षेत्र और भाषा के नाम पर हिंदू समाज को बांटने की साजिश करने वाली विघटनकारी ताकतों से स्वयंसेवकों को सजग रहने की अपील की। भागवत आज मेरठ के जागृति विहार एक्सटेंशन के 650 एकड में फैले संघ के साढे तीन लाख स्वयंसेवकों के राष्ट्रोदय एकत्रीकरण को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समय-समय पर अनेक राष्ट्र अस्तित्व में आते है और जब उनका प्रयोजन समाप्त हो जाता है तो वह भी लुप्त हो जाते हैं। हिंदुस्थान का प्रयोजन शास्वत है और इसीलिए यह कभी न मिटने वाला राष्ट्र है। भागवत ने कहा सूर्य सदैव अपने स्थान पर रहता है और पृथ्वी उसकी परिक्रमा करती है। जब पृथ्वी सूर्य से विमुख होती है तो अंधेरा छा जाता है। उन्होंने कहा जब लोग अपने जीवन मूल्यों से विमुख हो जाते हैं तब समाज जीवन में अंधकार छा जाता है। संघ प्रमुख ने कहा कि भारत से निकले तमाम मत और पंथों का मूल एक है जिसे सभी अपने-अपने तरीके से परिभाषित करते हैं। उन्होंने कहा कि कट्टर हिंदू का अर्थ है सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह के प्रति कट्टर प्रतिबद्धता रखना। भागवत ने कहा कि हिंदू वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से विश्व का चिंतन करता है पर संसार का एक नियम है, वह उसे ही मानता है जो शक्तिशाली हो। यहाँ तक कि देव भी दुर्बलों का सम्मान नहीं करते। उन्होंने कहा कि जिन मनुष्यों में मनुष्यता नहीं होती, वह धन, बुद्धि और बल का प्रयोग कमजोर लोगों को सताने के लिए करता है। जिनमें मनुष्यता नहीं है वही विद्वान अपनी विद्या का प्रयोग समाज में विवाद पैदा करने के लिए करता है। भागवत ने कहा कि मनुष्यता ही आज वैश्विक धर्म है जिसे दुनिया हिंदू धर्म कहती है। उन्होंने स्वयंसेवकों से संपूर्ण समाज को प्रत्यक्ष रूप से संघ कार्य से जोडने का आह्वान किया।

इससे पूर्व एक खुली सुसज्जित जीप में सवार होकर भागवत ने स्वयंसेवकों के एकत्रीकरण का निरीक्षण किया। बाद में करीब सवा तीन लाख पूर्णगणवेशधारी स्वयंसेवकों ने शारीरिक प्रदर्शन किया। इससे पूर्व ध्वजारोहण के साथ संघ की प्रार्थना हुई। जैन मुनि विहर्षि सागर महाराज के संबोधन के बाद  जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर अवधेशानंद जी गिरी महाराज ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आदि तीर्थ नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषि मुनियों के एकत्रीकरण के बाद आज का राष्ट्रोदय समागम दुनिया का सबसे बडा एकत्रीकरण है। उन्होंने कहा विश्व भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है। विश्व के समक्ष उतपन्न ज्वलंत समस्याओं के समाधान की दृष्टि से आज भारत और सनातन समाज की ओर सबकी निगाहें हैं।

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