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विपक्षी दलों की नकल के चलते बूथ प्रबंधन में किया बदलाव -प्रत्येक बूथ को जीवंत करने, संशाधनों और जातीय समीकरणों से युक्त होगी फौज 

नई दिल्ली:  मिशन-2019 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने देश की सभी 543 लोकसभा सीटों के बूथों को दुर्ग बनाने जा रही है। इसके लिए पार्टी ने गोपनीय तरीके से कमर कस ली है। वर्ष 2019 के आम चुनाव और उससे पूर्व के विधानसभा चुनावों में पार्टी का बूथ प्रबंधन मतदान के दौरान अन्य दलों से अधिक जीवंत और सक्रिय भूमिका निभा सके, इसके लिए विशेष तैयारी की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा प्रत्येक बूथ पर दलित, आदिवासी व पिछड़े तबके से चुने 20 लोगों की समिति बना रही है। इसके साथ ही स्मार्ट फोन के जरिये सोशल मीडिया पर सक्रिय 5 और 5 अन्य मोटरसाइकिल सवार युवाओं की टीम तैनात करेगी। इसके अलावा बूथ समिति को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वह स्थानीय मंदिर, मठ व आश्रमों के प्रमुखों व पुजारियों से नियमित संपर्क करें। साथ ही उन्हें भाजपा का सदस्य बनाएं। इसके अलावा सभी बूथ समितियों को स्थानीय स्तर पर सक्रिय संघ परिवार के लोगों से भी नियमित संपर्क रखने का निर्देश दिया गया है।
   बताते हैं कि कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल वर्ष-2014 के लोकसभा व बाद के विधानसभा चुनावों में भाजपा के बूथ प्रबंधन की अपार सफलता को देखते हुए अब नकल करने को मजबूर हुए हैं। इसको देखते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी पुरानी प्रबंधन शैली को बदल दिया है। साथ ही प्रत्येक बूथ को जीवंत करने के लिए संशाधनों और जातीय समीकरणों से युक्त फौज खड़ी करने का काम शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक राज्यों में 11 सदस्यीय चुनाव टोली और प्रत्येक लोकसभा सीट पर एक प्रभारी की तैनाती के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने निर्देश दिया है कि बूथों को नए सिरे से चाक चौबंद किया जाए। शाह ने स्वयं देशव्यापी संपर्क व दौरा कार्यक्रम शुरू किया हुआ है। इसके अलावा प्रभारियों की नियुक्ति के साथ ही प्रत्येक बूथ को चुनावों के लिए तैयार करने के लिए 22 सूत्रीय दिशा निर्देश जारे किए हैं। भाजपा सूत्रों के मुताबिक पहले भाजपा बूथ का एक अध्यक्ष नियुक्त करती थी, जिसके नीचे 11 से 21 सदस्य होते थे। लेकिन, अब भाजपा अपने बूथ प्रबंधन को नया स्वरूप दे रही है। इसके अलावा 22 नए दिशा निदे्रशों के तहत मंडल व मोर्चा प्रभारियों को 5-5 बूथ की जिम्मेदारी दी जा रही है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का पूरा जोर बूथों पर है, यही कारण है कि वह जिस भी राज्य में जाते हैं पहले बूथ प्रबंधन पर फोकस करते हैं।
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