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संसद सत्र के हंगामे की भेंट चढ़ा संसद सत्र, आज भी पारित नहीं कराया जा सका भ्रष्टाचार निवारण बिल

नई दिल्ली

संसद के दोनों सदनों की पिछले दिनों की तरह ही आज 21वें दिन की कार्यवाही भी हंगामे की भेंट चढ़ गई। जहां लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ फिर से विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव पेश नहीं हो सका, वहीं राज्यसभा में बुधवार पेश किया गया भ्रष्टाचार निरोधक संशोधन विधेयक हंगामे के कारण अटक गया।

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है, जहां कल शुक्रवार को अंतिम बैठक होनी है। राज्यसभा में गुरुवार को एक बार के स्थगन के बाद जब दोपहर बाद दो बजे कार्यवाही शुरू की गई तो बुधवार को केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह द्वारा पेश किये गये महत्वपूर्ण ‘भ्रष्टाचार निरोधक (संशोधन) विधेयक’ पर तृणमूल कांग्रेस के सुखेन्दु शेखर राय द्वारा मतविभाजन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उपसभापति प्रो. पीजे कुरियन ने हंगामा कर रहे सदस्यों को अपनी सीटों पर जाने का अनुरोध किया, लेकिन व्यवस्था न बनने के कारण सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद भी अन्नाद्रमुक, तेदेपा व टीआरएस के साथ ही बसपा के सदस्य आसन के करीब आकर अपने-अपने मुद्दे उठाकर हंगामा करने लगे। इस पर कुरियन ने नियम 256 का हवाला देते हुए हंगामा करने वाले सदस्यों के निलंबन करने की चेतावनी भी दी, लेकिन हंगामा जारी रहा। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के आनंद शर्मा ने केंद्रीय मंत्री के पार्टी पर लगाए गये आरोपो पर आपत्ति जताई और सरकार पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। हंगामा थमते न देख सदन की कार्यवाही को शुक्रवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

विधेयक पारित कराने का प्रयास विफल

उच्च सदन में बुधवार को भ्रष्टाचार निरोधक (संशोधन) विधेयक’ को पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने लोकसभा से पारित होने का जिक्र किया था, जिस पर सुखेन्दु शेखर राय ने व्यवस्था का सवाल उठाते हुए सरकार पर आरोप लगाए। इस पर उपसभापति कुरियन ने सदन को बताया कि यह भूलवश त्रुटि थी, जिसे सुधार लिया गया है और यह विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हुआ है। कुरियन ने बताया कि सुखेंदु राय की जानकारी की पुष्टि करते हुए बताया कि राज्यसभा में यह विधेयक 19 अगस्त 2013 को पेश किया गया था। उस समय उच्च सदन से इस विधेयक को छानबीन संबंधी संसद की स्थायी समिति के पास भेज दिया गया। एक साल बाद स्थायी समिति की रिपोर्ट मिलने पर इसे राज्यसभा की प्रवर समिति के सुपुर्द कर दिया गया। प्रवर समिति ने 11 अगस्त 2016 को इस पर रिपोर्ट पेश की। उसके बाद कल चार अप्रैल को सदन में पेश किया गया। इससे पहले इस संबन्ध में सुबह सभापति एम. वेंकैया नायडू ने भी भूलवश हुई इस त्रुटि की जानकारी देते हुए उसे सदन के रिकार्ड में दुरस्त करने की बात कही है। इससे पहले गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने पर नायडू ने दो नए सदस्यों को शपथ दिलाई और आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाने क कारण हंगामे को देखते हुए कार्यवाही को दो बजे तक स्थगित कर दिया।

फिर धरा रह गया अविश्वास प्रस्ताव

लोकसभा में भी विपक्षी दलों के हंगामे की वजह से गुरुवार को भी अविश्वास प्रस्ताव को पेश नहीं किया जा सका। सदन की कार्यवाही को शुरू होते ही तुरंत स्थगित कर दिया गया। इसके बाद हंगामे की वजह से 12 बजे बाद शुरू हुई कार्यवाही के दौरान लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। इस सत्र की कल शुक्रवार को अंतिम बैठक होना बाकी है।

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