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हवाई जहाज की तर्ज पर वीआईपी ट्रेनों में मिलेगा भोजन

नई दिल्ली ।

 ट्रेनों में यात्रा के दौरान अगर आप रेलवे का परंपरागत भोजन से ऊब चुके हैं तो परेशान मत होईये, आपके लिए रेलवे एक विशेष व्यवस्था लेकर आ रहा है। इसमें रेल यात्रियों को खाने की श्रेणी में ब्रांडेड कंपनियों का पनीर टिक्का सैंडविच, मसाला मैगी से लेकर चिकन कीमा उपलब्ध होगा। इसमें पानी की बोतल व सॉफ्ट ड्रिंक अथवा चाय-काफी भी दी जाएगी। यह सुविधा भी एयरलाइंस की तर्ज पर रेलवे शुरू करने जा रहा है, जिसका नाम कम्बो मील सेवा है। इसके तहत ट्रेनों में परोसे जाने वाले परंपरागत भोजन की अपेक्षाकृत अधिक स्वच्छ, उचित मात्रा व गुणवत्तापरक होगा।
यह सुविधा भारतीय रेलवे अपनी वीवीआईपी प्रीमियम ट्रेनों राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस व दुरंतो में कोम्बो मील (रेडी टू ईट) सेवा शुरू करने जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक रेल मंत्रालय अगले माह से ट्रेनों में कम्बो मील सेवा को शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसकी शुरूआत प्रीमियम ट्रेनें राजधानी, शताब्दी व दुरंतो टे्रनों में की जाएगी। वर्तमान में रेलवे के कैटरिंग ठेकेदार परंपरागत खाने की आपूर्ति करते हैं। इनके ठेके समाप्त होने पर प्रीमियम ट्रेनों में बड़े होटल उद्योग, कैटरिंग क्षेत्र की राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय कंपनियों को कम्बो मील आूपर्ति करने के ठेके दिए जांएगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यात्रियों को सामान्य दर पर स्वच्छ, स्वादिष्ठ व पर्याप्त मात्रा में भोजन मिलेगा।
इस नई सुविधा में यात्रियों को पनीर टिक्का सैंडविच, चिकन सैंडविच, वड़ा-पाव, रवा उपमा, पोहा, संभार चावल, टमाटर नूडल्स, मैगी मसाला, चिकन कीमा आदि दिया जाएगा। इसके अलावा जूनियर कम्बो मील में कूकीज, केक, सॉफ्ट ड्रिंग आदि का दिया जाएगा। इसके अलावा डिमांड करने पर ब्रांडेड खाने में रोटी, सब्जी, दाल, चावल, अचार, चाय-काफी आदि की आपूर्ति की जाएगी। ब्रांडेड कंपनियां के कैटरिंग से यात्रियों को खाने की शिकायत नहीं होगी। वर्तमान में रेलवे ठेकेदारों के खाने को लेकर काफी शिकायतें रहती हैं। प्रीमियम टे्रनों में किराये के साथ ही खाने का पैसा लिया जाता है। इसलिए यात्रियों के पास कोई विकल्प नहीं होता है। कम्बो मील से उनकी समस्या समाप्त हो जाएगी।
यह परंपरागत खाने की अपेक्षाकृत सस्ता, स्वादिष्ठ और स्वच्छ होगा। बता दें कि एयरलाइंस में यात्री कम्बो मील काफी पंसद करते हैं।
रेलवे बोर्ड के सूत्रों की माने तो रेलवे के खानपान सेवा में दशकों से कैटरिंग माफिया के दबदबे को कम करना है। इसके चलते ही पिछले सात साल में नई कैटरिंग पॉलिसी को लागू नहीं किया जा सकता है। हालांकि फरवरी 2017 की कैटरिंग पॉलिसी के तहत खाना पकाने और खाने की आपूर्ति को पृथक कर दिया गया है। इसमें खाना पकाने और आपूर्ति करने वाली राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को ठेका दिया जाएगा। हालांकि इसमें अभी काफी वक्त लगने की संभावना है।

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