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तीनों सेनाओं की क्षमता बढ़ाने पर खर्च होंगे 130 अरब डॉलर

नई दिल्ली। केंद्र सरकार अगले पांच से सात सालों में सशस्त्र बलों की सामरिक क्षमता बढ़ाने के लिए 130 अरब डॉलर खर्च करेगी। सरकार ने सेना, वायुसेना और नौसेना के आधुनिकीकरण को गति देने के लिए व्यापक योजना बनाई है। इसके तहत तीनों सेनाओं के लिए कुछ सालों में अहम हथियार, मिसाइल, लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां और युद्धपोत खरीदे जाएंगे।

सूत्रों के मुताबिक सरकार की प्राथमिकता थल सेना का आधुनिकीकरण है। इसके तहत 2600 युद्धक वाहन और 1700 अत्याधुनिक वाहन खरीदे जाएंगे। वायुसेना के लिए 110 बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान खरीदे जाने हैं। सूत्रों ने बताया कि तीनों सेनाएं उत्तरी और पश्चिमी सीमा पर एक साथ युद्ध से निपटने की तैयारी के लिए पर्याप्त धन आवंटन पर जोर दे रही हैं। सरकार भी इस बात से अच्छी तरह वाकिफ है कि चीन वायु और समंदर में लगातार ताकत बढ़ा रहा है। इसके चलते वायुसेना और नौसेना को भी उसकी बराबरी पर लाना जरूरी है। नौसेना ने तीन से चार साल में 200 जहाज, 500 विमान और 24 लड़ाकू पनडुब्बियां खरीदने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। फिलहाल नौसेना के पास 132 जहाज, 220 विमान और 15 पनडुब्बियां हैं।

शहरों के हवाई क्षेत्र बनेंगे अभेद्य
सरकार दिल्ली, मुंबई समेत सभी बड़े शहरों के हवाई क्षेत्र को अभेद्य बनाने की योजना पर भी काम कर रही है। भारत अपनी अंतर-महाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइल अग्नि-5 के पहले बैच को शामिल कर रहा है, जिससे देश की वायु रक्षा प्रणाली बेहद मजबूत होगी। पांच हजार किलोमीटर मारक क्षमता की यह मिसाइल परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम है। अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और उत्तरी कोरिया समेत कुछ ही देशों के पास ऐसी मिसाइलें हैं।

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