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PM ने की राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत, कहा-बेटियां बोझ नहीं परिवार की आन-बान और शान हैं

झुंझनु ।

राष्ट्रीय पोषण मिशन के शुभारंभ और बेटी-बचाओ अभियान के विस्तार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान के झुंझुनूं पहुंचे।  झुंझुनूं में पीएम मोदी ने कार्यक्रम में शामिल हुई महिलाओं और बच्चों से बात की।

राजस्थान पहुंचे पीएम मोदी ने कहा कि आज पूरा देश झुंझुनूं से जुड़ गया है। झुंझुनूं झुकना नहीं जानता, युद्ध हो या फिर अकाल, ये झुकना नहीं जानता है। पिछली 4-5 पीढ़ियों की बुराई एकत्र हो गई हैं। इनसे निपटने में समय लगेगा। समाज में महिला पुरुष की समानता का चक्र चलता रहता है।

उन्होंने कहा कि बेटी बोझ नहीं बल्कि पूरे परिवार की आन-बान शान है। अपने आस-पास देखें कैसे लड़कियां परिवार और राष्ट्र का सम्मान बढ़ा रही हैं।

उन्होंने कहा कि  बेटियों को गर्भ में मारने से बड़ा पाप कोई भी नहीं है। वेद से विवेकानंद वाले इस देश में वो कौन सी बुराई घर कर गई कि आज हमें अपने ही घर में बेटी बचाने के लिए हाथ-पैर जोड़ने पड़ रहे हैं, बजट से पैसा खर्च करना पड़ रहा है।

पीएम ने कहा कि   ‘बेटा-बेटी एक’ भाव के लिए हमें एक सामाजिक और जन आंदोलन खड़ा करने की जरूरत, मैं सभी से अपील करूंगा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को लेकर जन आंदोलन बनाना होगा, हमें एक सामाजिक आंदोलन खड़ा करना पड़ेगा।  यह जरूरी है कि देश की महिलाओं को और हमारे बच्चों को पोषण प्रदान किया जाए। सरकार के साथ-साथ परिवार की भी जिम्मेदारी है।

पीएम ने कहा कि हमारी सरकार ने हरियाणा से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ को लॉन्च किया। इसके बाद बेटियों के अनुपात में सुधार हुआ। जो लोग मानते हैं कि बेटा बुढ़ापे की लाठी बनेगा वो गलत सोचते हैं। मैंने देखा है कि बेटे आराम से जिंदगी जी रहे हैं और मां-बाप वृद्धाश्रम में समय बिता रहे हैं।

उन्होंने कहा घर में सास कह दे कि हमें बेटियां ही चाहिए तो यकीन मानिए किसी की हिम्मत नहीं होगी कि बेटियों को पैदा होने से रोक सके। बेटियों के जन्म के लिए जागरुकता फैलानी होगी।

झुंझुनूं में पीएम मोदी ने कहा कि मेरे विरोधी जितना भी मुझे भला-बुरा कहें, उनकी मर्जी है। बस ऐसा करें कि अगर पीएम बोले तो उसका मतलब नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री) नहीं पोषण मिशन होना चाहिए।

पीएम के दौरे से पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने झुंझुनूं पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार दिसंबर 2014 में झुंझुनूं से बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ आंदोलन राज्यभर में शुरू हुआ था, उसी उत्साह के साथ महिला दिवस पर इस अभियान के विस्तार का कार्यक्रम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस अभियान को देशभर में आंदोलन का रूप देने में झुंझुनूं जिला अग्रणी रहा है।

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