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प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अन्तर्गत पात्र कृषकों को दिये जायेगे प्रतिवर्ष 6 हजार रूपयेः प्रभारी जिलाधिकारी

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मुज़फ्फरनगर।

मुख्य विकास अधिकारी/प्रभारी जिलाधिकारी अर्चना वर्मा ने कहा कि भारत सरकार द्वारा 01 फरवरी को पेश किए बजट में किसान सम्मान निधि की स्थापना की गयी है, जिसमें लघु एवं सीमान्त कृषकों के परिवारों को प्रति वर्ष 6 हजार रूपयें डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर के माध्यम से प्रदान किया जाएगा। साथ ही कहा की यह धनराशि 2 हजार रूपयें की तीन समान किश्तों में प्रदान की जायेगी। वर्मा ने बताया कि इस योजना को 01.12.2018 से लागू किया गया है एवं 01.12.2018 से 31.03.2019 की समयावधि के लिए 2 हजार रूपये की किश्त को लघु सीमान्त कृषक परिवारों के बैंक खातों में स्थानान्तारित किया जायेगा।

भारत सरकार के द्वारा 01 फरवरी को जारी किए गये आदेश में राज्य सरकारों से लघु एवं सीमान्त कृषक परिवारों के नाम पते, बैंक खाता नं0, आधार नं0, जिन कृषकों के पास आधार नं0 उपलब्ध न हो तो उनका आधार पंजीकरण संख्या, मोबाइल फोन नं0 इत्यादि उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा की गयी है। उन्होंने बताया कि प्रथम किश्त आधार नं0 अथवा भारत सरकार के पत्र में उल्लिखित किसी अन्य पहचान पत्र के आधार पर दी जा सकती है, किन्तु वित्तीय वर्ष 2019-2020 से मिलने वाली किश्तों के लिए आधार नं0 का होना अनिवार्य होगा।

मुख्य विकास अधिकारी/प्रभारी जिलाधिकारी अर्चना वर्मा जिला पंचायत सभागार में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के क्रियान्वयन के सम्बन्ध में बैठक की अध्यक्षता कर रही थी। उन्होने कहा कि इस योजना को क्रियान्वित जिलाधिकारी के नेतृत्व में किया जायेगा। मुख्य विकास अधिकारी इस कार्य हेतु नोडल अधिकारी होगे। कृषि विभाग इस योजना हेतु नोडल विभाग होगा। उन्होने बताया कि राजस्व ग्रामवार भूलेख से कृषकों की सूची निकाल ली जाएगी तथा प्रत्येक राजस्व ग्राम में लघु एवं सीमान्त कृषकों को भूमि के क्षेत्रफल के आधार पर चिन्हित कर लिया जायेगा। उन्होने बताया कि कृषि विभाग के पारदर्शी किसान योजना के पोर्टल से भी राजस्व ग्रामवार लघु एवं सीमान्त कृषकों की सूची निकाल ली जाएगी तथा इसका मिलान भूलेख की सूची से कर लिया जाएगा। उन्होने कहा कि मिलान करने के पश्चात भूलेख में उपलब्ध लघु एवं सीमान्त कृषकां की सूची को दो भागों में विभक्त कर दिया जाएगा। भाग-एक में वह नाम रहेगे जो पारदर्शी किसान की उस गांव की सूची में उपलब्ध हो। भाग-दो में उस गांव के वैसे लघु एवं सीमान्त कृषक होगें जिनके नाम पारदर्शी किसान के पोर्टल में अंकित नही है।

मुख्य विकास अधिकारी/प्रभारी जिलाधिकारी ने कहा कि भाग-एक में उपलब्ध कृषकों के परिवार के दृष्टिकोण से परीक्षित कर लिया जायेगा। यदि पति-पत्नी या उनके नाबालिग बच्चें, तीनों के नाम पर पृथक-पृथक भूमि उपलब्ध है, जो उसे जोडते हुए एक इकाई माना जाएगा एवं तीनों में से किसी एक को ही लाभार्थी के अन्तिम सूची में रखा जाएगा। उन्होने बताया कि उस परिवार के अन्य ग्रामों में स्थित भूमि को भी जोडते हुए पात्रता का निर्धारण किया जाएगा। इस प्रकार से भाग-एक की सूचना को पूर्ण करते हुए तत्काल भारत सरकार के पोर्टल पर यह सूचना इनके बैंक खातों में धन स्थानान्तरित करने हेतु उपलब्ध करायी जायेगी। उन्होने कहा कि सूची को उपलब्ध कराने के पूर्व पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसे ग्राम पंचायत के समक्ष प्रदर्शित किया जाएगा तथा बैंक खाता सं0 अथवा मोबाइल फोन नं0 आदि में कोई त्रुटि हो तो इसे नोट करते हुए तत्समय ही इसे संशोधित कर लिया जाएगा। उन्होने बताया कि जनपद के लेखपालों की संख्या के बराबर की संख्या में अन्य विभाग यथा-ग्राम्य विकास, पंचायतीराज, कृषि, सहकारिता इत्यादि के कर्मचारियों की सूची तैयार की जाएगी। उक्तानुसार सूची बन जाने के पश्चात लेखपाल एवं एक अन्य ग्राम स्तरीय कर्मचारी अर्थात दो कर्मचारियों की एक टीम बनायी जाएगी। प्रत्येक टीम के आवश्यकतानुर राजस्व ग्रामों की संख्या का आंवटन किया जाएगा।

मुख्य विकास अधिकारी/प्रभारी जिलाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक 20 से 25 राजस्व ग्राम पर एक सेक्टर प्रभारी नामित किया जाएगा जो योजना अन्तर्गत निर्दिष्ट समस्त कार्यों के समयबद्व निष्पादन हेतु उत्तरदायी होगे। उन्होने कहा कि भूलेख एवं पारदर्शी पोर्टल से ग्रामवार सूची निकालना, प्रत्येक राजस्व ग्राम हेतु टीम का गठन एवं उनके गांव भ्रमण का कार्यक्रम इत्यादि तैयार करने का कार्य पूर्ण किया जायेगा। उन्होने कहा कि 11 फरवरी तक जनपद के सभी राजस्व ग्रामों का भ्रमण एवं सर्वेक्षण किया जाना है। प्रत्येक दिनं सांय काल से टीम के द्वारा सत्यापित किए गये आंकडों को जिला स्तर पर उपलब्ध कराया जाएगा तथा अगले दिन इनकी कापी जनपद में उपलब्ध डाटा एंट्री आपरेटर के माध्यम से तैयार करवायी जाएगी।

इस कार्य हेतु समस्त विभागों के डाटा एंट्री आपरेटर्स से आवश्यकतानुसार कार्य लिया जाएगा। डाटा को संग्रह किए गये सत्यापित डाटा को डिजिटाइज्ड करने एवं प्रधानमंत्री किसान पोर्टल में अपलोड करने की कार्यवाही जिला सूचना विज्ञान अधिकारी के पर्यवेक्षण में किया जाएगा। बैठक में अपर जिलाधिकारी वि0/रा0 आलोक कुमार, डीएफओ सूरज कुमार, उप निदेशक कृषि नरेन्द्र कुमार, जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया सहित सभी बीडीओ व सम्बन्धित अधिकारीगण उपस्थित थे।

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