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क्यों मनाया जाता है ‘वैलेंटाइन डे’? जानिए पूरा सच

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आलेख-(कुलदीप बलभद्री)

हमारा देश भारत अलग अलग संस्कृति वाला देश है। इसमे प्रत्येक दिन कोई न कोई त्योहार जरूर रहता है। लेकिन भारतीय लोग मिलजुलकर इन त्योहारो को बड़े ही सद्भाव के साथ मनाते है। चाहे होली हो, दीवाली हो, क्रिसमस हो, कोई भी त्योहार हो सब एक साथ मिलकर मनाते है। और इन त्योहारो के पीछे एक सच्ची कहानी जरूर होती है। ऐसा ही एक दिन है वैलेंटाइन डे। हालांकि हम इसे त्योहार नही कह सकते लेकिन इंडिया में लोग इसे एक त्योहार की तरह ही मनाने लगे है।

जिसका हमारे लोगो मे बड़ा ही क्रेज़ है। यह 14 फरवरी को मनाया जाता है। और इसे प्यार का दिन भी कहते है। लेकिन आपको इसके बारे में पता भी है कि यह क्यों मनाया जाता है..और इसे 14 फरवरी को ही क्यों मनाया जाता है..इसके पीछे की हिस्ट्री क्या है। इस दिन के पीछे भी एक कहानी है शायद आप लोगो पता हो लेकिन अगर नही पता तो आज हम आपको बताएंगे कि इस दिन के पीछे की कहानी क्या है और इसे 14 फरवरी को ही क्यों मनाया जाता है।
तो चलिए शुरू करते है……

वैलेंटाइन डे एक व्यक्ति के नाम पर रखा गया है जिसका नाम वैलेंटाइन था। इस प्यार के दिन की कहानी की शुरुआत प्यार से भरी हुई नहीं है। ये कहानी एक दुष्ट राजा और कृपालु संत वैलेंटाइन के बिच हुए मुठभेड़ के बारे में है। इस दिन की शुरुआत होती है रोम की तीसरी सदी से जहाँ एक अत्याचारी राजा हुआ करता था जिसका नाम क्लॉडियस था। रोम के राजा का ये मानना था की एक अकेला सिपाही एक शादी शुदा सिपाही के मुकाबले जंग के लिए एक उचित और प्रभावशाली सिपाही बन सकता है। क्यूंकि शादी शुदा सिपाही को हर वक़्त बस इसी बात की चिंता लगी रहती है कि उसके मर जाने के बाद उसके परिवार का क्या होगा और इसी चिंता से वो जंग में अपना पूरा ध्यान नहीं दे पाता है। यही सोच कर क्लॉडियस राजा ने ऐलान किया की उसके राज्य का कोई भी सिपाही शादी नहीं करेगा और जिस किसी ने भी उसके इस आदेश का उलंघन किया तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी।

राजा के इस फैसले से सभी सिपाही दुखी थे और उन्हें ये भी पता था की ये फैसला गलत है। लेकिन राजा के डर से किसी ने भी इसका उलंघन करने की हिम्मत नहीं की और उनकी इस आज्ञा का पालन करने के लिए मजबूर हो गए। लेकिन रोम के संत वैलेंटाइन को ये नाइंसाफी बिलकुल मंजूर नहीं थी, इसलिए उन्होंने राजा से छुपकर युवा सिपाहियों का मदद की और उनकी शादी करवाने लगे। जो भी सिपाही अपनी प्रेमिका से शादी करना चाहते थे वो वैलेंटाइन के पास मदद मांगने जाते थे और वैलेंटाइन उनकी मदद भी करते थे और उनकी शादी करवा देते थे। इसी तरह वैलेंटाइन बहुत से सिपाहियों की गुप्त शादी करवा चुके थे। लेकिन वो कहते है ना की सच ज्यादा दिन नही छुपता एक न एक दिन सबके सामने आ ही जाता है और इस हुआ संत वैलेंटाइन के साथ भी….राजा क्लॉडियस को इसका पता चल चुका था। वैलेंटाइन ने राजा के आदेश का पालन नहीं किया इसलिए राजा ने वैलेंटाइन को सजा-ए-मौत की सजा सुना दी और उन्हें जेल के अन्दर डाल दिया गया।

जेल के अन्दर वैलेंटाइन अपनी मौत की तारीख का इंतज़ार कर रहे थे और एक दिन उनके पास जेलर आया जिसका नाम आस्ट्रियस था। रोम के लोगों का कहना था की वैलेंटाइन के पास एक दिव्य शक्ति थी जिसके इस्तेमाल से वो लोगो को रोगों से मुक्ति दिला सकता था। आस्ट्रियस की एक अंधी बेटी थी और उसे वैलेंटाइन के पास बसी जादुई ताकात के बारे में पता था इसलिए वो वैलेंटाइन के पास जाकर उनसे विनती करने लगा की उसकी बेटी की आँखों की रौशनी को अपने दिव्य शक्ति से ठीक कर दे। वैलेंटाइन एक नेक दिल के इंसान थे और वो सबकी मदद करते थे इसलिए उन्होंने जेलर की भी मदद की और उनकी अंधी बेटी की आँखों को भी अपनी शक्ति से ठीक कर दिया ।

उस दिन के बाद से वैलेंटाइन और आस्ट्रियस की बेटी के बिच गहरी दोस्ती हो गयी थी और वो दोस्ती कब प्यार में बदल गयी उन्हें पता ही नहीं चला। आस्ट्रियस की बेटी को वैलेंटाइन की मौत होने वाली है ये सोच सोच कर गहरा सदमा लग गया था। और आखिरकार वो दिन 14 फ़रवरी आ गया था जिस दिन वैलेंटाइन को फाँसी लगने वाली थी। अपनी मौत से पहले वैलेंटाइन ने जेलर से एक पेन और कागज माँगा और उस कागज़ में उसने जेलर की बेटी के लिए अलविदा सन्देश लिखा, पन्ने के आखिर में उसने “तुम्हारा वैलेंटाइन” लिखा था, ये वो लफ्ज़ हैं जिसे आज भी लोग याद करते हैं ।

वैलेंटाइन के इस बलिदान की वजह से 14 फ़रवरी को उनके नाम से रखा गया और इस दिन को पूरी दुनिया में सभी प्यार करने वाले लोग वैलेंटाइन को याद करते हैं और एक दुसरे के साथ प्यार बाँटते हैं । इस दिन को सभी प्यार करने वाले लोग अपने प्रेमी प्रेमिका को फुल, तोहफे और चॉकलेट्स देकर अपने प्यार का इजहार करते हैं।

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