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पित्ती (आमवात) जैसे भयानक रोग का भी अचूक इलाज है होम्योपेथ मे, पाये पित्ती से छुटकारा

मुजफ्फरनगर। होम्योपैथिक विधि से करीब छ दशक से भी अधिक समय से लोगो का इलाज कर रहे नगर के सुप्रसिद्ध चिकित्सक डां चन्द्र प्रकाश गोयल इस बार पित्ती आमवत बीमारी के इलाज के बार मे जानकारी दे रहे है।
आज हम पित्ती (आमवात) URTICARIA रोग से छुटकारा पाने का उल्लेख करते है। इसके कारण निम्नानुसार है।
यह रोग अण्डा, मछली, माँस, शराब आदि खाने पीने की कोई अन्य वस्तु या किसी प्रकार के कपड़े से हुई एलर्जी के कारण हो जाता है।
लक्षण – शरीर में जगह जगह जगह ददेाडे़ फूल उठते हैं, उनमें खुजली व जलन होती है। कभी अपने आप ठीक हो जाती है, कभी कभी रोगी को बहुत कष्ट भोगना पड़ता है।
रोगी निम्नलिखित दवाईयों का प्रयोग कर लाभ उठायें। आप महसूस करेगें कि दवाईयों का ऐफेक्ट तो है पर साइडएफेक्ट नही है।
(1)पित्ती (आमवात) जो पसीना आने से खुजर्ली कम हो जाती है, मरीज सो जाता है।
आदि में रस – टाक्सिकोडेण्डून (RHUS – TOXICODENDRON) 30 शक्ति की दिन में तीन बार लें।
(2)सविराम – ज्वर की शीतावस्था में या शीतावस्था के पहले पिन्ती निकलना और उन्तापावस्था में गायब हो जाने आदि में –
हिपर सल्फर (HEPER SULPHER) 200 शक्ति की एक खुराक रोज लें।
(3)पुराने और नये आमवात (पित्ती) में
हाइडैªस्टिस कैनाडेन्सिस (HYDRASTIS CANADENSIS) मूल अर्क (Q) रोज तीन बार लें।
(4)मलेरिया ज्वर के बाद एका एक पित्ती (आमवात) आदि में इलटिरियम (ELATERILIM) 30 शक्ति दिन में तीन बार लें।
(5)अतिसार के साथ पित्ती (आमवात) का होना – बिछौने की गर्मी से खुजर्ली का बढना आदि में
बोविस्टा (BOVISTA) 30 शक्ति दिन में 3 बार लें।
(6)पित्ती के उदे्दों को दो रंग गुलाबी या कुछ सफेदी लिये लाल चकन्ते की तरह चमड़े पर ददोरे जैसी पिन्ती निकलना जिसमें बहुत खुजलाहट, जलन, और डंक मारने जैसा दर्द हो, आदि में –
एपिस मेलिफिका (APIS MELLIFICA) 30 शक्ति दिन में 3 बार लें।
(7)आमवात (पित्ती) होने का कोई कारण ठीक – ठीक न पता लगने आदि में –
क्लोरेम (CHLORALUM) 200 शक्ति की खुराक रोज ले।
(8)आमवात (पित्ती) यदि रक्तहीन हो जाने के कारण या सर्दी में रोग बढ़ने और उन्ताप से घटने आदि में – आर्सेनियम ऐल्बम (ARSENILUM ALBUM) 30 शक्ति की दिन में 3 बार लें।
(9)आमवात (पित्ती) –
> गर्भावस्था की अवस्था में डालिकस प्रूरियेन्स (DOLCHOS PRLIRIENS) 30 शक्ति दिन में 3 बार लें।
> पुराने आमवात में सर्दी आरम्भ होते ही रोग हो जाएमें। डल्कामारा (DULCAMARA) 30 शक्ति दिन में तीन बार लमंें
> ऋतुस्राव के बाद हो जाने में क्रियोजोटम (KREOSOTUM) 30 शक्ति दिन में 3 बार लें।
> माँस, मछली, खाने से हो जाने में रूटा ग्रैवियोलैन्स (RUTA GRAVEOLENS) 30 शक्ति दिन में 3 बार लें।
(10)प्रायः सभी तरह के आमवात (पिन्ती) में बहुत जलन, बहुत ज्यादा खुजली और काटाॅ गड़नें की तरह का दर्द, रोगी को लगातार उस पर हाथ फेरते रहना। हाथ मुँह और छाती का चमड़ा फूल जाना, गरम हो उठना, ददोरे निकलना, सोने पर ददोरे गायब हो जाना किन्तु बिछौने से उठते ही फिर निमल आना, छलशुदा मछली खाने के कारण आदि में आर्टिका यूरेन्स (URTICA URENS) मूल (Q) दिन में 3 बार लें। ब्राहय प्रयोग के लिए भी आर्टिका यूरेन्स (Q) की 10 से 20 बूंदे 2 चाय चम्मच पानी में मिलाकर चकन्तो पर लगाए।
नोट – युक्त दवाईयो के प्रयोग या समझने में किसी प्रकार की कठिनाई होने पर होम्योपैथिक चिकित्यक से परामर्ष अवष्य लें।
होम्योपैथिक दवाईयां कही से भी, किसी भी होम्योपैथिक स्टोर से, किसी भी पोटेसी (शक्ति) गोलियो की शक्ल मे खरीदी जा सकती है। गोलियां आमतौर पर 30 नम्बर साईज की होती है जो बच्चो को 4-6 बड़ो को 8 से 10 गोलियो की एक खुराक में लेनी चाहिए। आप अपनी आवश्यकतानुसार गोलियाँ, एवं ड्राम, दो ड्राम, आधा औंस, एवं एक औसं मात्रा में खरीद सकते है।
मूल अर्क जिसे फ के निशान से जाना जाता है। केवल तरल (लिकविड) रूप में ही स्टोर से मिलता है। बच्चो को 2 से 4 बून्द, बडो को 10 से 15 बून्द तक होम्योपैथिक चिकित्सक के निर्देशानुसार दो चम्मच पानी में मिलाकर (एक खुराक) दी जा सकती है।
मूल अर्क को 5 एम0 एल0, 10 एम0 एल0, 15 एम0 एल0 और अधिकतम 30 एम एल की मात्रा में खरीदा जा सकता है।
होम्योपैथिक दर्वाअयो को हाथ से नही छुवा जाता है। दवाईयो को लेने के आधा घण्टे पहले व घण्टा बाद तक कुछ न खायें। (पानी पी सकते है)

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