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केजरीवाल ने अब नितिन गडकरी और कपिल सिब्बल से भी माफी मांगी

नई दिल्ली ।

दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी के संयोजकअरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भी माफी मांग ली है। साथ ही कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल और उनके बेटे अमित सिब्बल को लेकर दिए गए बयान को लेकर भी खेद जताया है। इससे पहले उन्होंने अकाली नेता बिक्रम मजीठिया से माफी मांगी थी जो उनके अब तक के तेवरों के लिहाज से आश्चर्य की बात मानी गई थी और पंजाब में उनकी पार्टी में विद्रोह की स्थिति पैदा हो गई थी।
केजरीवाल ने गडकरी को भारत के सर्वाधिक भ्रष्ट लोगों की सूची में शामिल बताया था। अब केजरीवाल ने पत्र लिखा और इस विवादास्पद बयान के लिए खेद जताया। उन्होंने गडकरी से मानहानि का केस बंद करने का अनुरोध करते हुए लिखा, “मेरी आपसे कोई निजी रंजिश नहीं है। पूर्व में दिए अपने बयान के लिए अफसोस जाहिर करता हूं।” दोनों नेताओं में आपसी सहमति भी बन गई है और केस बंद करने के लिए कोर्ट में अर्जी दे दी गई है।

गडकरी की वकील पिंकी आनंद ने कहा कि मानहानि केस किसी क्रिमिनल केस की तरह बेहद गम्भीर होता है। संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के बारे में कोई भी टिप्पणी कर देने वालों को सबक लेना चाहिए। लगता है कि अरविंद केजरीवाल अपनी राजनीति के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं।
गौरतलब है कि केजरीवाल ने 2013 में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कपिल सिब्बल के बेटे अमित सिब्बल पर ‘निजी लाभ के लिए शक्तियों के दुरुपयोग’ का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि कपिल दूरसंचार कंपनी की तरफ से सर्वोच्च न्यायालय में उस समय पेश हुए, जब उनके पिता केंद्रीय संचार मंत्री थे। अब इस आरोप के लिए भी केजरीवाल ने कपिल व अमित सिब्बल से खेद प्रकट किया है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को लेकर दिए गए बयान को लेकर भी मानहानि का केस चल रहा है।

क्या है धड़ाघड़ माफी मांगने की वजह ?

केजरीवाल के खिलाफ कुछ ऐसे ही केस देश के अन्य हिस्सों जैसे वाराणसी, पंजाब, अमेठी, असम, महाराष्ट्र, गोवा और अन्य जगहों पर भी दायर हैं। गौरतलब है कि ऐसे मामलों में व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में मौजूद होने की जरूरत पड़ती है।

पार्टी का कहना है कि ऐसे अधिकतर मामले उनके राजनीतिक विरोधियों द्वारा उन्हें हतोत्साहित और कानूनी मामलों में उलझाए रखने के लिए ही किए हैं। पार्टी की कानूनी टीम ने ऐसे सभी मामलों को आपसी सहमति से सुलझाने की सलाह दी है।

दिल्ली में दायर मामलों को फास्ट ट्रैक पर रखा गया है जिसकी वजह से विधायकों व मंत्रियों को रोजाना या तो दिल्ली या अन्य राज्यों की अदालतों में उपस्थित रहना पड़ता है। पार्टी का कहना है कि एक तो वो ऐसे ही संसाधनों की कमी झेल रहे हैं और ये केस पार्टी के लिए बस एक बोझ की तरह हैं।

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