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सीबीएसई से छिनी NEET, JEE और NET की परीक्षाएं, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को सौंपा

नई दिल्ली। सीबीएसई को शायद पेपर लीक होने के मामले का खामियाजा भुगतना पड़ा है, जिसके कारण सरकार ने उससे नीट, जेईई मेन्स, यूजीसी नेट, प्रबंधन से जुड़ी सीमैट और फार्मेसी से जुड़ी जीपैट परिक्षाऐं कराने का अधिकार छीन लिया है? अब इन परीक्षाओं का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) कराएगी।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान इस बदलाव की जानकारी देते हुए कहा कि एनटीए अब यूजीसी नेट की परीक्षा दिसंबर में आयोजित करेगी। मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी परीक्षा आयोजन के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण सुधार है और इसे इस वर्ष से शुरू करने का निर्णय किया गया है। इस बारे में आज वेबसाइट पर कुछ सूचनाएं डाली जायेंगी और 2-3 दिनों में पूरी सूचना डाल दी जायेगी। उल्लेखनीय है कि नीट परीक्षा में करीब 13 लाख छात्र बैठते हैं, जबकि जेईई मेन्स में 12 लाख छात्र तथा यूजीसी नेट में 12 लाख छात्र बैठते हैं। सीमैट में एक लाख छात्र और जीपैट में 40 हजार छात्र हिस्सा लेते हैं।

अब नीट और जीईई प्रवेश परीक्षा साल में दो बार

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने घोषणा की है कि अगले साल से मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन वर्ष में दो बार आयोजित की जाएगी। नीट की परीक्षा हर साल फरवरी और मई माह में आयोजित होगी। जबकि जेईई (मेन्स) की परीक्षा हर साल जनवरी और अप्रैल में कराई जाएगी। वहीं नेट की परीक्षा दिसंबर में कराई जाएगी। प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अब नीट, जेईई, नेट परीक्षाओं का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी करेगी। अब तक इन परीक्षाओं के आयोजन की जिम्मेदारी सीबीएसई पर थी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छात्र दोनों बार परीक्षा दे सकते हैं। प्रवेश के लिए दोनों में से उच्च प्राप्तांक पर विचार किया जाएगा।

भाषा के विकल्प पर विचार नहीं

मंत्री ने बताया कि इन परीक्षाओं के संदर्भ में पाठ्यक्रम, प्रश्नों के रूप और भाषा के विकल्प के बारे में कोई बदलाव नहीं किया गया है। परीक्षा की फीस में भी कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है। जावड़ेकर ने बताया कि ये परीक्षाएं कम्प्यूटर आधारित होंगी। उन्होंने कहा कि इस बारे में छात्रों को घर पर या किसी केंद्र पर अभ्यास करने की सुविधा दी जायेगी। यह मुफ्त होगा। हर परीक्षा कई तिथियों में आयोजित होगी अर्थात 4-5 दिनों तक चल सकती हैं।

यूजीसी बदलाव के बिल में फंसा पेंच

दरअसल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को एक पत्र लिखा है, जिसमें उनका कहना है कि रायशुमारी के लिए कम से कम 30 दिन का समय दिया जाना चाहिए जो नहीं दिया गया है। सरकार ने इस बिल को 27 जून को बेवसाइट पर जारी कर लोगों से सात जुलाई की शाम पांच बजे तक राय देने के लिए कहा है। प्रकाश जावड़ेकर को लिखे पत्र में वोरा ने इसके अलावा इसे अन्य भाषाओं में भी प्रकाशित कराने की मांग की, ताकि देश के दूसरे हिस्सों से भी सुझाव मिल सकें। उन्होंने बिल को तैयार करने और उस पर जनता से ली जाने वाली राय को लेकर तय नियमों का हवाला दिया और कहा कि बिल को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया है। कांग्रेस इससे पहले यूजीसी बदलाव के इस फैसले पर भी विरोध जता चुकी है। सरकार ने पिछले दिनों यूजीसी को खत्म कर उसकी जगह राष्ट्रीय उच्च शिक्षा आयोग के गठन की घोषणा की थी। नए आयोग के पास यूजीसी से ज्यादा अधिकार होंगे। नया आयोग फर्जी संस्थानों के खिलाफ जुर्माना लगाने के अलावा सजा भी सुना सकेगा। सूत्रों की मानें तो 18 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में इस बिल को लाने के लिए ही सरकार ने रायशुमारी की समयसीमा कम रखी थी। हालांकि अब इस नए पेंच से यह मामला उलझ सकता है।

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