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मातृभाव से लोकसभा का संचालन करती हैं सुमित्रा महाजन

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की महिला शाखा राष्ट्र सेविका समिति की संस्थापक लक्ष्मीबाई केलकर की जयंती पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि वह मातृभाव से सदन चलाने का प्रयास करती हैं।

इस कार्यक्रम में समिति के सदस्यों को संबोधित करते हुए महाजन ने कहा कि जिस तरह मां सार्वजनिक रूप के बजाय बंद कमरे में अपने बच्चों को डांटती है, उसी तरह उनके काम में बेहतर संतुलन कायम करने की जरुरत होती है। उन्होंने कहा कि जब वह अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठती हैं तो सोचती हैं कि सभी दलों की अपनी राजनीति है। उनकी अपनी समस्याएं हैं और अपने नेता हैं जिन्होंने सांसदों को कुछ करने का निर्देश दिया होता है। वह सदैव उन्हें समझने का प्रयास करती हैं। महाजन ने कहा कि मेरा प्रयास सदैव सदन को सुचारु रुप से चलाना होता है। यदि वे उसके बाद भी नहीं समझते हैं तो तब वह सदन स्थगित कर देती हैं, उन्हें अपने केबिन में बुलाकर समझाती हैं और उन्हें सलाह भी दे देती रही हैं। लोकसभा अध्यक्ष की यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है जब संसद का मानसून सत्र 16 जुलाई को शुरू होने वाला है। उसकी करीब 18 बैठकें होंगी। किसी का नाम लिए बगैर महाजन ने कहा कि कई नेताओं को समिति के बारे में जानकारी नहीं है और वे गलत दृष्टिकोण रखते हैं। उन्होंने कहा कि वह इस समिति की सेविका हैं, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष होने के नाते यह बात वह किसी सार्वजनिक मंच पर कुछ नहीं कह सकती। उन्होंने कहा कि उन्होंने संघ की इस महिला शाखा के बारे में जानकारी देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को एक पत्र और समिति के इतिहास की एक पुस्तक भेजी है। राहुल गांधी ने पिछले साल दस अक्तूबर को गुजरात के वड़ोदरा में विद्यार्थियों की एक सभा में कहा था कि आरएसएस में कितनी महिलाएं हैं? राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख डॉ. शरद रेनू ने कहा कि कोई भी व्यक्ति तभी आनंद की अनुभूति कर सकता है, जब परिवार और समाज में आनंद हो। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में राष्ट्र का केंद्र बिंदु परिवार है और परिवार का केंद्र बिंदु स्त्री। स्त्री ही परिवार, समाज और राष्ट्र को चलाती है।

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