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सघन टीबी रोगी खोज अभियान में मिले 96 मरीज, 22 जून तक चलेगा अभियान

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मुजफ्फरनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2025 तक भारत को टीबी रोग से मुक्त करने के लक्ष्य के साथ जिला क्षय रोग विभाग ने एक बार फिर सघन टीबी रोगी खोज अभियान शुरू किया है। 10 जून से शुरू हुआ अभियान 22 जून तक चलेगा। पुनरीक्षित क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की टीम के सदस्य घर-घर जाकर टीबी के मरीजों की जांच कर रहे। अभियान में अब तक करीब 96 टीबी मरीज मिले हैं। इनमें 3 बच्चे भी शामिल हैं। इन सभी का इलाज शुरू कर दिया गया है।अभियान के तहत मरीजों को इलाज के साथ –साथ जागरूक भी किया जा रहा है। ताकि वे अपने साथ-साथ अन्य लोगों को भी इस जानलेवा बीमारी के प्रकोप से बचा सकें।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पी.एस. मिश्रा ने बताया कि इस अभियान के तहत साधारण टीबी के मरीजों के साथ ही ऐसे मरीजों को खोजा जा रहा है जो बेहद गंभीर हैं और उन्हें लंबे समय से इस बीमारी की जानकारी तक नहीं थी। उन्होंने कहा कि इन मरीजों का इलाज तो कराया ही जाएगा साथ ही उनकी कड़ी निगरानी भी की जा जाएगी। उन्होंने बताया कि जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में की गयी जांच में 342 लोग ऐसे मिले जिनमें टीबी के लक्षण होने का शक था। बाद में उनके बलगम की जांच की गई, जिसमें 96 लोगों में टीबी होने की पुष्टि हुईइनमें 3 बच्चे भी शामिल हैं। इन सभी का इलाज शुरू कर दिया गया है।जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. योगेंद्र त्रिखा ने बताया ने कि सबसे ज्यादा मरीज ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। इसकी बड़ी वजह ग्रामीण क्षेत्रों में अशिक्षित और मजदूर वर्ग का ज्यादा होना है। इनको लम्बे समय तक खांसी रहती है, तो भी ये उसे गंभीरता से नहीं लेते। ऐसे में खांसी टीबी का रूप ले लेती है। अभियान में इन लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हाईरिस्क वाले इलाकों पर विशेष फोकस है।अभियान के लिए 40 टीमों का गठन किया गया है। प्रत्येक दिन 50-60 घरों में सर्वे किया जा रहा है। जनपद में 20490 घरों सर्वे कराया जाएगा।

डा.त्रिखा ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइड लाइन्स पर टीबी मरीजों की दवा की खुराक में भी बदलाव किया गया है। मरीजों को अब रोजाना और वजन के हिसाब से दवा खिलाई जाती है। उन्होंने निक्षय पोषण योजना की जानकारी देते हुए बताया कि इसके तहत टीबी मरीज को इलाज के दौरान हर माह पाच सौ रुपये दिये जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से मरीजों को थोड़ी राहत मिलेगी क्योंकि अधिकतर मरीजों की स्थिति ऐसी नहीं होती कि वह दवा के साथ पौष्टक आहार ले सकें।

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