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एक दशक बाद म्यामार सेना के हाथों में फिर आया देश का नियंत्रण

बैंकॉक। म्यामार में सोमवार को सैन्य तख्तापलट के बाद सैन्य नेतृत्व द्वारा राष्ट्रपति बनाए गए व्यक्ति को 2007 में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों के खिलाफ कार्रवाई में उसकी भूमिका और ताकतवर सैन्य नेताओं के साथ संबंधों के लिए जाना जाता है। सेना ने सोमवार को देश की शीर्ष नेता आंग सान सू ची और उनकी पार्टी के अन्य नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद सेना ने मिंट स्वे को राष्ट्रपति नामित किया। इससे पहले वह सेना द्वारा नियुक्त उपराष्ट्रपति थे।  राष्ट्रपति नामित किए जाने के तुरंत बाद मिंट स्वे ने देश के शीर्ष सैन्य कमांडर सीनियर जनरल मिन आंग लाइंग को सत्ता की कमान सौंप दी। म्यामार के 2008 में बने संविधान के तहत, आपातकाल की स्थिति में राष्ट्रपति सैन्य कमांडर को सत्ता की कमान सौंप सकता है। लाइंग (64) 2011 से सैन्य बलों के कमांडर हैं और जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं, यानि यदि जुंटा वादे के अनुसार एक साल में चुनाव कराता है तो उनके असैन्य नेतृत्व की भूमिका संभालने का रास्ता साफ हो जाएगा। सेना ने यह कहकर तख्तापलट को सही ठहराया है कि सरकार चुनाव में धोखाधड़ी के उसके दावों पर कार्रवाई करने में नाकाम रही है। चुनाव में सेना के समर्थन वाली यूनियन सॉलिडैरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था। अमेरिका सरकार ने गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन में शामिल होने के कारण लाइंग को 2019 में काली सूची में डाल दिया था। लाइंग ने राखिने क्षेत्र में सुरक्षा अभियानों के दौरान सेना का नेतृत्व किया था। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार जांचकर्ताओं का कहना है कि अभियान के दौरान सेना की कार्रवाई के कारण रोहिंग्या समुदाय के करीब सात लाख लोगों को अपने घर छोड़कर भागना पड़ा था। स्वे ने 2017 में एक जांच का नेतृत्व किया था, जिसमें सेना पर लगे इन आरोपों को खारिज किया गया था और कहा गया था कि सेना ने वैध तरीके से काम किया। स्वे (69) पूर्व जुंटा नेता थान वे के निकट सहयोगी हैं। उल्लेखनीय है कि म्यामार में सेना ने सोमवार को तख्तापलट कर दिया और शीर्ष नेता आंग सान सू ची समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। पांच दशकों तक सैन्य शासन में रहे इस देश में सैन्य तख्तापलट की दुनिया के विभिन्न देशों और संगठनों ने निंदा की है और हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा करने की मांग की है।

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