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कप्तान के आदेश के बाद यात्रियों की जेब हुई ढीली -दैनिक यात्रियों समेत छात्रों को उठानी पड़ रही परेशानी

खतौली। यात्रियों को लाने तथा ले जाने के लिए चलाई जा रही रोड़वेज बसों को नगर के बाहर से चलाने के एसएसपी के आदेश के बाद यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चिलचिलाती धूप में महिलाएं, बच्चे, बुजूर्ग परेशान नजर आ रहे है। वही एसएसपी के इस फरमान से जहां यात्रियों के लिए यात्रा करना मुसीबत सबब बनता जा रहा है। वही ई-रिक्शा चालको की चांदी हो गई है। यात्रियों को यात्रा पूरी करने में अधिक रुपया तथा अधिक समय लगाना पड़ रहा है।
ज्ञात हो कि यातायात व्यवस्था सूचारू करने के लिए लागू किए गए रूट डायवर्जन प्लान के बाद यात्रियों समेत स्कूली छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छात्र-छात्राएं लम्बे रूट की बसों की प्रतिक्षा में स्कूल जाने में लेट हो रहे है, वही यदि लम्बे रूट की बस आ भी जाती है तो वह शहर के बाहर से जाने का इशारा कर निकल जाती है। रोड़वेज डिपों के बाहर बसों की लम्बी-लम्बी कतारे वहां से हट गई है, जो सड़क हर समय भीड़ भाड़ से व्यस्त रहती थी, वही आज यात्री बसों की तलाश में पसीने बहा रहे है। यात्रा करने के लिए यात्रियों को जेब ढीली करनी पड़ रही है। उधर जाम के नाम पर जारी किए गए फरमान से ई-रिक्शाओं ने सड़क पर अपनी जगह बना ली है। रोड पर चलने वाली ई-रिक्शा अन्य वाहनों को जगह नही दे रही है, जिस कारण यातायात सूचारू होने के बजाय और व्यवस्ता बिगड़ती दिख रही है। जब इस बारे मंे समाज सेवी कमल मित्तल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि प्रशासन को कोई भी नियम लागू करने से पहले गरीब लोगों की आर्थिक स्थिति को भी मददेनजर रखना चाहिए। चूकि बसों के बाहर से संचालन होने पर यात्रियों को टैम्पू या ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ेगा। जिस कारण अधिक खर्च होेगा जो सीधे तौर पर गरीब की रसोई पर फर्क डालेगा। छात्र आनन्द का कहना है कि जब से बसे मुजफ्फरनगर शहर में जानी बंद हुई है, तब से काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्कूल जाने के लिए समय से पहले घर से निकलना पड़ता है, साथ ही ई-रिक्शा का बोझ भी झेलना पड़ रहा है। जब इस बारे में मोहन कश्यप से बात की गई तो उनका कहना था कि रोडवेज डिपों के नगर से बाहर जाने पर रोडवेज डिपों के बाहर से जाम की स्थिति समाप्त हो गई लेकिन महावीर चैक की स्थिति जस की तस ही है। ई-रिक्शा चालको ने भीड़ लगा रखी है। उनका कहना है कि यदि बस वहलना चैक के बजाय जे आई सी के मैदान से संचालित की जाए तो जाम भी नही लगेगा और यात्रियों के साथ छात्रों को भी सुविधा रहेगी। किसान कौसर अली से बात की गई तो उनका कहना था कि पहले ही गन्ने का भुगतान किसानों को नही मिलता, ऊपर से बसे वहलना चैक से चला दी गई है, किसानों के बच्चे भी शहर पढाई के लिए जाते है, किसानों की जेबों पर अतिरिक्त दबाव बढ रहा है।

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