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महिलाओं के प्रतिनिधित्व में पाकिस्तान-बाग्लादेश से भी पीछे भारत

नई दिल्ली। ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजद प्रमुख नवीन पटनायक ने लोकसभा चुनाव के लिए राज्य में पार्टी की ओर से एक तिहाई महिला प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया। यह भारतीय राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का संकेत है। लेकिन अभी भी लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। वर्ष 2014 में हुए आम चुनाव में 670 महिला प्रत्याशियों ने किस्मत आजमाई थी। यह संख्या 2009 के चुनाव के मुकाबले 20 फीसदी अधिक थी। आंकड़ों के मुताबिक महिला प्रत्याशियों की संख्या ही नहीं बढ़ रही है बल्कि पुरुष-महिला प्रत्याशियों का अनुपात में भी सुधार आया है। 1984 के चुनाव में जहां प्रत्येक 100 पुरुष प्रत्याशी पर तीन महिला उम्मीदवार थीं। वहीं 2014 में यह संख्या बढ़कर प्रत्येक 100 पुरुष प्रत्याशी पर नौ महिला प्रत्याशी हो गई।

पूरा प्रतिनिधित्व नहीं-
मैदान में ताल ठोकने वाली महिलाओं की संख्या तो बढ़ी है लेकिन अब भी आबादी में अनुपात में उनका प्रतिनिधित्व नहीं है। 2014 में रिकॉर्ड 63 महिलाएं चुनकर लोकसभा पहुंची थीं। पर 1962 के चुनाव में करीब आधी महिला प्रत्याशियों को जीत मिली। वह 2014 में घटकर मात्र ’9.4 फीसदी रह गई।

पाकिस्तान बांग्लादेश से भी पीछे-
अंतर-संसदीय संघ के आंकड़ों के मुताबिक लोकसभा में केवल 13 फीसदी महिला सदस्य हैं जबकि वैश्विक स्तर पर संसद के निम्न सदन में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 18 फीसदी है। यहां तक पड़ोसी पाकिस्तान और बांग्लादेश भी संसद में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने में कहीं आगे हैं। पाक और बांग्लादेश की संसद में क्रमशरू 20 प्रतिशत और 21 प्रतिशत महिला सांसद हैं।

उत्तर प्रदेश की स्थिति बेहतर-
उत्तरप्रदेश के दल लैंगिंक असमानता के आरोपों का सामना करते हैं। लेकिन 2014 के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां पर प्रत्येक 100 पुरुष प्रत्याशियों पर 11 महिला उम्मीदवार थीं। इसके उलट तमिलनाडु में प्रत्येक 100 पुरुष प्रत्याशी पर मात्र छह महिलाएं मैदान में थीं।.

आरक्षित सीटों पर महिलाएं अधिक-
2014 में मैदान में उतरी 670 महिला प्रत्याशियों में 24 प्रतिशत अुनसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों पर किस्मत आजमा रही थीं। राजनीतिक विश्लेषक फ्रांसिस्का जेनसेनियस कहते हैं कि अधिकतर दल इन सीटों को कम प्रतिस्पर्धा वाले मानते हैं। यही वजह है कि आरक्षित सीटों पर महिला सांसदों का अनुपात अधिक है।

भाजपा महिला प्रत्याशियों की सफलता दर ज्यादा-
क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय दलों को अधिक महिलाओं को मैदान में उतारने की चुनौती देते हैं। लेकिन आंकड़ों की मानें तो पहले ही राष्ट्रीय दल क्षेत्रीय दलों के मुकाबले अधिक महिलाओं को प्रत्याशी बना रहे हैं। पांरपरिक रूप से कांग्रेस अधिक महिला प्रत्याशियों को उतारती है। लेकिन भाजपा की महिला प्रत्याशियों की सफलता दर सबसे अधिक है।

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