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नड्डा के काफिले पर हमले का मामला:केंद्र और ममता सरकार के बीच बढ़ी तकरार

नई दिल्ली।  पश्चिम बंगाल में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हुए पथराव के मामले पर गृह मंत्रालय ने सोमवार को राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को तलब किया है। दोनों को आज दोपहर 12.15 बजे मंत्रालय पहुंचने के लिए कहा गया था। हालांकि दोनों अधिकारी मंत्रालय नहीं पहुंचे। इससे पहले ही मुख्य सचिव ने केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला को पत्र लिखकर आने में असमर्थता जताई थी। ऐसे में अब माना जा रहा है कि इससे राज्य और केंद्र सरकार के बीच प्रशासनिक और कानूनी जंग शुरू हो सकती है। तृणमूल कांगेस (टीएमसी) के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने शनिवार को केंद्रीय गृह सचिव भल्ला को पत्र लिखकर कहा कि जेपी नड्डा के काफिले पर हुए हमले को लेकर बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी को दिल्ली तलब करना राजनीति से प्रेरित है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था राज्य का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन को भयभीत करने के लिए दबाव डालने वाली कार्रवाई की जा रही है। बनर्जी ने कहा कि हम आपको सूचित करना चाहते हैं कि संविधान की सातवीं अनूसूची के तहत कानून व्यवस्था राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में आप कानून-व्यवस्था के संदर्भ में किसी भी तरह की चर्चा के लिए कैसे दोनों अधिकारियों को बुला सकते हैं?

बंगाल सरकार के खिलाफ शुरू हो सकती है बर्खास्त करने की कार्रवाई-गृह मंत्रालय ने इस मामले पर बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ की कानून व्यवस्था पर रिपोर्ट मिलने के बाद बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी को 14 दिसंबर को गृह मंत्रालय में तलब किया था। हालांकि राज्य सरकार ने इन दोनों अधिकारियों को नहीं भेजा। ये अधिकारी इस समय राज्य सरकार के अधीन काम कर रहे हैं और बिना उसकी मर्जी के दिल्ली नहीं आ सकते हैं। मंत्रालय को अब इन अधिकारियों को सूचित करना पड़ेगा कि आखिर राज्य सरकार क्यों उन्हें आने नहीं दे रही है। ऐसे में यदि केंद्र राज्यपाल की कानून व्यवस्था रिपोर्ट को लेकर अड़ जाता है तो बंगाल सरकार के खिलाफ धारा 356 के तहत बर्खास्त करने की कार्रवाई शुरू हो सकती है।

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