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लॉकडाउन के दौरान जंगली जानवरों के अवैध शिकार के मामले दो गुना बढ़े

नई दिल्ली। कोरोना वायरस लड़ने के लिए विश्वभर में लगाए गए लॉकडाउन ने जंगली जानवरों के अवैध शिकार के मामले दोगुना बढ़ा दिए हैं। यही नहीं वैश्विक स्तर पर भी जानवरों के शिकार की संख्या तेजी से बढ़ी है। जानिए कि अवैध शिकार के मामले क्यों बढ़ रहे हैं, शिकारियों को रोकने में क्या परेशानियां आती हैं और इन पर कैसे रोक लगाई जा सकती है। द वाइल्ड लाइफ ट्रेड मॉनिटरिंग नेटवर्क ‘ट्रैफिक’ के मुताबिक विश्व स्तर पर अलग-अलग देशों में हुए लॉकडाउन की वजह से वन्य जीव संरक्षण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। सब कुछ बंद हो जाने की वजह से वन्य जीव संरक्षण के काम से जुड़े स्टाफ की गतिविधियां बाधित हुई। इससे जंगली जानवरों का शिकार करने वाले शिकारियों को अवैध शिकार करने का अच्छा मौका मिल गया। रिपोर्ट की माने तो प्रतिबंधित क्षेत्र में जंगली जानवरों का अवैध शिकार बढ़ा है। इसमें कुछ मामले व्यापार से भी जुड़े हुए हैं। दरअसल भारत में संस्था की अगुवाई कर रहे भारतीय वन अधिकारी डॉ साकेत बडोला ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यह स्टडी भारत में 12 हफ्तों के दौरान दर्ज हुए मामलों के आधार पर तैयार की गई है। इन 12 हफ्तों में छह सप्ताह वो हैं जब देश में लॉकडाउन नहीं था और बाकी के छह हफ्ते वो हैं जब देश में लॉकडाउन था। रिपोर्ट के अनुसार शिकारियों ने सबसे ज्यादा बड़े स्तनधारी जीवों का शिकार किया है। जहां यह आंकड़ा 22 फीसदी था वहीं लॉकडाउन में बढ़कर 40 फीसदी हो गया। यही नहीं इस दौरान जानवरों का अवैध शिकार करने वाले समय के साथ आधुनिक उपकरण और तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए वन विभाग के लिए ये चुनौती और बढ़ जाती है। वन स्टाफ को भी तकनीकी, लॉजिस्टिक्स स्तर पर और सम्मिलित होने की जरूरत है।

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