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केंद्र का लघु और सीमांत किसानों के लिए पेंशन योजना और किसान क्रेडिट कार्ड अभियान पर विचार-विमर्श

नई दिल्ली- केन्द्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गुरूवार को वीडियो कांफ्रेंस के जरिये सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के कृषि मंत्रियों के साथ बैठक की। इस बैठक में भारत सरकार की तीन प्रमुख योजनाओं – प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि योजना (पीएम-किसान), लघु और सीमांत किसानों के लिए पेंशन योजना और किसान क्रेडिट कार्ड अभियान को लागू करने के बारे में विचार-विमर्श किया गया।

उन्‍होंने सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से सभी पात्र किसान परिवारों और लाभार्थियों की समयबद्ध रूप से नामांकन प्रक्रिया में तेजी लाने का अनुरोध किया, जिससे अप्रैल से जुलाई, 2019 की अवधि के लिए पीएम-किसान के तहत लाभ सीधे ही किसानों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया जा सके। उन्‍होंने सभी 18-40 वर्ष की आयु वर्ग के किसानों के लिए पेंशन योजना शुरू करने के बारे सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को जानकारी दी और इस योजना के बारे में जागरूकता पैदा करने का भी अनुरोध किया। कृषि मंत्री ने सभी राज्यों से अगले 100 दिनों में किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत एक करोड़ किसानों को शामिल करने के लिए गांव-गांव में अभियान चलाने का अनुरोध किया।

पीएम-किसान योजना किसानों के लिए एक आय सहायता योजना है। यह शत-प्रतिशत केन्द्रीय क्षेत्र योजना है, जिसमें किसानों को 3 बराबर किश्तों में 6000 रूपये की राशि प्रति वर्ष दी जाएगी। यह योजना सभी किसानों के लिए 01.04.2019 से लागू कर दी गई है। इस योजना से 14.5 करोड़ लोग लाभांवित होंगे। छोटे और सीमान्‍त किसानों के लिए लागू पेंशन योजना सभी किसानों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्‍ध कराएगी। इस योजना के तहत पात्र छोटे और सीमान्‍त किसानों को 3,000 रुपये प्रति माह की निर्धारित पेंशन उपलब्‍ध कराई जाएगी। इस योजना का उद्देश्‍य पहले तीन वर्षों में 5 करोड़ लाभार्थियों को शामिल करना हैं। यह स्‍वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना है, जिसमें प्रवेश आयु 18 से 40 वर्ष है। लाभा‍र्थी पेंशन निधि में योगदान करके योजना का सदस्‍य बनने का विकल्‍प चुन सकते हैं।

केन्‍द्र सरकार भी बराबर राशि का पेंशन निधि में अंशदान करेगी। इस योजना के तहत किसान पीएम-किसान योजना से प्राप्‍त लाभ में से सीधे ही इस योजना में अंशदान करने का विकल्‍प चुन सकते हैं। पूरी पारदर्शिता के लिए ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली बनाई जाएगी। किसान क्रेडिट कार्ड 1998 में शुरू किये गये थे। वर्तमान में 14.5 करोड़ जोतधारकों के मुकाबले 6.92 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) जारी किये गये हैं। अधिक से अधिक केसीसी जारी करने के लिए शुरू की गई मौजूदा पहलों में पशुपालन और मत्स्य पालन व्‍यवसाय से जुड़े किसानों को शामिल करना, केसीसी के तहत ऋण के निरीक्षण खाता-निर्धारण प्रभार और प्रोसेसिंग फीस हटाना, मौजूदा कृषि ऋण पर जमानत शुल्क की सीमा को बढ़ाकर एक लाख से 1.6 लाख करना शामिल हैं। गुजरात, महाराष्ट्र, उत्‍तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्‍तर राज्‍यों की केसीसी के मामले में पिछड़े राज्‍यों के रूप में पहचान की गई है। अगले 100 दिनों में एक करोड़ किसानों को किसान क्रेडिट योजना में शामिल करने का लक्ष्‍य हासिल किया जाना है।

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