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सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन लागू करने का मामला,केंद्र को मिला एक महीने का समय

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन के मामले में सरकार के अपने आदेश को लागू करने के लिए एक और महीने का समय दे दिया है। शीर्ष अदालत ने कोरोना महामारी को देखते हुए सरकार को ये समय दिया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को सेना के 10 विभागों में स्थायी कमीशन देने का निर्देश दिया है। हालांकि कोर्ट के इस फैसले के बाद भी युद्ध क्षेत्र में महिला अधिकारियों को तैनाती नहीं मिलेगी। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और इंदु मलहोत्रा की पीठ ने सुनवाई करते हुए केंद्र को आदेश को पालन करने को कहा है। केंबता दें कि सरकार ने महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन के 2010 के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने 2010 में शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत सेना में आने वाली महिलाओं को सेवा में 14 साल पूरे करने पर पुरुषों की तरह स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया था। रक्षा मंत्रालय ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। लेकिन 17 फरवरी को शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में महिलाओं को स्थायी कमीशन देने का फैसला सुनाया था। कोर्ट ने फरवरी में अपने फैसले में कहा कि उन सभी महिला अफसरों को 3 महीने के अंदर सेना में स्थायी कमीशन दिया जाए, जो इस विकल्प को चुनती हैं।

महिलाओं को मिलेगा स्थायी कमीशन-कोर्ट में सुनवाई के दौरान रक्षा मंत्रालय ने कहा कि निर्णय की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। केंद्र सरकार की ओर से बाला सुब्रमण्यम ने अदालत से कहा कि ऑफिस ऑर्डर कभी भी आ सकता है, लेकिन कोरोना को देखते हुए और वक्त दिया जाना चाहिए। महिला अफसरों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मीनाक्षी लेखी से अदालत ने पूछा कि क्या और वक्त नहीं दिया जाना चाहिए? लेखी ने कहा कि दिया जा सकता है लेकिन अदालत इसकी निगरानी करे। केंद्र सरकार ने कोरोना के चलते स्थायी कमीशन लागू करने और महिला अफसरों को कमांड पोस्टिंग के प्रावधान के लिए 6 महीने का और वक्त मांगा है।

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