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केंद्र सरकार ने राज्यों को दिए 3000 वेंटिलेटर,एम केयर्स फंड से मिले हैं 2000 करोड़

नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत बने वेंटिलेटर देश के विभिन्न राज्यों के अस्पतालों को मुहाय करने लगी है। पहले चरण में करीब 3000 वेंटिलेटर राज्यों को दिए गए हैं। ये वेंटिलेटर कोरोना रोगियों के लिए आवश्यक जीवन रक्षक चिकित्सा उपकरण है, क्योंकि उनमें से कुछ एक्यूट रेस्परेटरी डिजीज सिंड्रोम (एआरडीएस) विकसित करते हैं। एक मई को स्वास्थय मंत्रालय के एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, जून तक भारत में 75 हजार वेंटिलेटर की मांग होगी। एक अधिकारी ने कहा, ‘अभी तक राज्यों को 3000 वेंटिलेटर दिए जा चुके हैं, जो कि विभिन्न अस्पतालों में लगाए जाएंगे। कुछ भेजे जा रहे हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में वेंटिलर के निर्माण में तेजी आएगी। मेक इन इंडिया पहल को आगे बढ़ाते हुए वेंटिलेटर के स्थानीय निर्माताओं की पहचान की गई है। उन्हें निर्देशों के बारे में बताया गया। प्रशिक्षण और अन्य प्रोटोकॉल को अंतिम रूप देते हुए नई आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाई गईं। उन्हें आपूर्तिकर्ताओं और राज्य सरकारों के साथ लॉजिस्टिक मुद्दों के साथ मदद की गई।  आपको बता दें कि प्रमुख घरेलू निर्माताओं में स्कैनरे के सहयोग से भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) शामिल है। बीईएल को 30,000 वेंटिलेर के ऑर्डर दिए जा चुके हैं। केंद्र सरकार ने 13 मई को कहा था कि देश भर में कोरोना मामलों से निपटने के लिए बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए 50 हजार मेड इन इंडिया वेंटिलेटर लगभग 2000 करोड़ की लागत से पीएम केयर्स फंड से खरीदे जाएंगे। ये वेंटिलेटर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सरकार द्वारा संचालित कोरोना अस्पतालों में दिए जाएंगे। इस बीच वेंटिलेटर की आपूर्ति करने के लिए हैमिल्टन, माइंड्रे और ड्रेगर जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भी ऑर्डर दिए दिए गए हैं। विदेश मंत्रालय उनसे 10,000 वेंटिलेटर की सोर्सिंग के लिए चीन में सप्लायर्स से भी संपर्क कर रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार जून 2020 तक व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किटों की कुल अनुमानित मांग करीब दो करोड़ है। आज तक, सरकार ने विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एक करोड़ से अधिक पीपीई किट वितरित किए हैं। अब तक उन्हें एक करोड़ से अधिक एन-95 मास्क प्रदान किए गए हैं।

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