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सेंट्रल विस्टा कानूनी नहीं, गलत प्राथमिकताओं का मुद्दा:कांग्रेस

नई दिल्ली। कांग्रेस ने ‘सेंट्रल विस्टा’ परियोजना को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया कि सरकार इस परियोजना को ऐसे समय आगे बढ़ा रही है जब देश कोरोना संकट और आर्थिक मंदी का सामना कर रहा है तथा सरकार ने सैनिकों, सरकारी कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों के भत्ते में हजारों करोड़ रुपये की कटौती की है। इस परियोयजना को मिली पर्यावरण मंजूरी और भूमि उपयोग में बदलाव की अधिसूचना को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर से बरकरार रखने का फैसला दिए जाने के बाद कांग्रेस ने कहा कि यह परियोजना कानून से जुड़ा मुद्दा नहीं, बल्कि सरकार की ‘गलत प्राथमिकताओं’ का विषय है। सुप्रीम कोर्ट ने ‘सेंट्रल विस्टा’ परियोजना को मिली पर्यावरण मंजूरी और भूमि उपयोग में बदलाव की अधिसूचना को मंगलवार को बरकरार रखा और राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट तक तीन किलोमीटर के क्षेत्र में फैली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का रास्ता साफ कर दिया। सेंट्रल विस्टा परियोजना की घोषणा सितंबर 2019 में की गई थी। इसके तहत त्रिकोण के आकार वाले नए संसद भवन का निर्माण किया जाएगा जिसमें 900 से 1,200 सांसदों के बैठने की व्यवस्था होगी। इसका निर्माण अगस्त 2022 तक पूरा होना है। उसी वर्ष भारत 75वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। सुरजेवाला ने ट्वीट कर आरोप लगाया, ‘13,450 करोड़ रुपये की सेंट्रल विस्टा परियोजना कोई विधि सम्मत मुद्दा नहीं है, बल्कि एक ऐसे ‘तानाशाह’ की गलत प्राथमिकताओं का विषय है जो अपना नाम इतिहास में दर्ज कराना चाहते हैं।

सेंट्रल विस्टा प्रॉजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी-उन्होंने कहा कि विडंबना यह है कि कोरोना महामारी और आर्थिक मंदी के समय भी केंद्र सरकार के पास सेंट्रल विस्टा पर खर्च करने के लिए 14,000 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री का विमान खरीदने के लिए 8000 करोड़ रुपये है। परंतु इसी भाजपा सरकार ने 11.3 लाख सशस्त्र बलों और केंद्र सरकार के कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों के भत्ते में 37,530 करोड़ रुपये की कटौती कर दी। कांग्रेस नेता ने यह आरोप भी लगाया, ‘प्रधानमंत्री को यह नहीं भूलना चाहिए कि उन्होंने 15 लाख सैनिकों और 26 लाख सैन्य पेंशनभोगियों पर 11,000 करोड़ रुपये की कटौती लागू की है। इसके साथ ही, इस सरकार ने लद्दाख में चीनी आक्रामकता का मुकाबला कर रहे हमारे जवानों के लिए ‘गर्म टेंट’ और दूसरे उपकरण प्रदान नहीं किए। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार पर्यावरण संबंधी मुद्दों को लेकर हमेशा संवेदनशील रही है। उन्होंने कहा कि सरकार निर्माण की अवधि के दौरान उच्चतम मानकों का पालन करना जारी रखेगी।

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