Press "Enter" to skip to content

सेंट्रल विस्टा परियोजना: प्रधानमंत्री के संसद पहुंचने का अलग होगा इंतजाम, आम सड़कों का नहीं करेंगे इस्तेमाल

नई दिल्ली। सेंट्रल विस्टा परियोजना के अंतर्गत देश में नए संसद भवन का निर्माण कार्य लगातार जारी है। आजादी के 75वें वर्षगांठ पर साल 2022 में इसके पूरा होने की उम्मीद है। इन सबके बीच खबर यह आ रही है कि नए संसद भवन से जोड़ने के लिए टनल बनाए जा रहे है। यानी कि वीवीआईपी लोगों के मूवमेंट में अब ज्यादा रुकावट नहीं आएगी। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास, उप राष्ट्रपति का घर और संसद में सांसदों के चेंबर से इस टनल को जोड़ा जाएगा। इन टनल्स को बनाने का उद्देश्य बाधारहित वीवीआईपी मूवमेंट को जारी रखना है। साथ ही साथ वीवीआईपी मूवमेंट से जो सड़कें ब्लॉक करनी पड़ती है उसे भी अब नहीं करनी पड़ेगी। सेंट्रल विस्टा रीडेवेलपमेंट परियोजना के तहत प्रधानमंत्री आवास और पीएमओ साउथ ब्लॉक की तरफ होगा जबकि नॉर्थ ब्लॉक की तरफ उप राष्ट्रपति का आवास होगा। वर्तमान में जहां ट्रांसपोर्ट और श्रम शक्ति भवन मौजूद है वहीं पर सांसदों के चेंबर होगा। इन टनल्स यानी कि भूमिगत सुरंगों की संख्या तीन होगी। इसकी खासियत यह है कि यह तीनों सुरंग प्रधानमंत्री के नए निवास, उपराष्ट्रपति का घर और सांसदों के चेंबर को नए संसद भवन के साथ जोड़ेगा। इन भूमिगत सुरंगों से भी वीवीआईपी मूवमेंट आसान बनेगा। हालांकि, यह कहा जा रहा है कि इस सुरंग सिंगल लेन होंगी। संसद भवन में सभी सांसदों के कार्यालय अलग-अलग होंगे और वह भी पूरी तरह डिजिटल होंगे। पेपर लेस कार्यालय बनाने की ओर केंद्र सरकार का यह पहला कदम होगा। लेकिन फिलहाल राष्ट्रपति भवन को जोड़ने के लिए कोई सुरंग नहीं बनाई जा रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति को बार-बार संसद जाने की आवश्यकता नहीं होती है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में दिसंबर में संसद के नए भवन का शिलान्यास किया था। इसके बनने में लगभग 971 करोड रुपए का खर्च आएगा। इससे पहले सुप्रीप कोर्ट ने बहुमत से फैसला सुनाते हुए सेंट्रल विस्टा परियोजना की खातिर पर्यावरण मंजूरी और भूमि उपयोग में बदलाव की अधिसूचना को बरकरार रखा। सेंट्रल विस्टा परियोजना की घोषणा सितंबर 2019 में की गई थी। इसके तहत त्रिकोण के आकार वाले नए संसद भवन का निर्माण किया जाएगा जिसमें 900 से 1,200 सांसदों के बैठने की व्यवस्था होगी। नये भवन में एक संविधान कक्ष (कॉंस्टीट्यूशन हॉल) भी होगा, जो भारत की लोकतांत्रिक धरोहर को प्रदर्शित करेगा। इसके अलावा संसद सदस्यों के लिये एक लाउंज, एक पुस्तकालय, कई समितियों के लिये कमरे, खान-पान के लिये स्थान और वाहन पार्किंग की जगह भी होगी। संविधान कक्ष में संविधान की मूल प्रति भी रखी जाएगी। भारत की लोकतांत्रिक धरोहर आदि को डिजिटल माध्यमों से दिखाया जाएगा।

More from राजनीतिMore posts in राजनीति »

Be First to Comment

Leave a Reply

Mission News Theme by Compete Themes.