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कांग्रेस नेता दिग्विजय की सचिन पायलट को सलाह, न बनें ज्योतिरादित्य सिंधिया

नई दिल्ली। राजस्थान के सियासी संकट के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह भी कूद पड़े हैं। मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार को बचाने में असफल रहे दिग्गी राजा ने राजस्थान के बागी नेता सचिन पायलट को सलाह दी है कि वे ज्योतिरादित्य सिंधिया न बनें। सिंधिया ने इसी साल मार्च में अपने 24 विधायकों को लेकर कांग्रेस छोड़ दिया था, जिससे कमलनाथ की सरकार गिर गई थी।

राजस्थान के सियासी संकट के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हुए कांग्रेस नेता दिग्वजय सिंह ने एक न्यूज एजेंसी को दिए साक्षात्कार में कहा कि सचिन पायलट के पक्ष में उनकी उम्र है और कांग्रेस में उज्ज्वल भविष्य है, इसलिए जो ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया, उसका उन्हें अनुसरण नहीं करना चाहिए। दिग्विजय ने भावुक अंदाज में कहा कि सचिन उनके बेटे की तरह हैं। वह मेरा सम्मान करते हैं और मैं भी उन्हें पसंद करता हूं। मैंने उन्हें तीन-चार फोन दिया, लेकिन यह पहली बार है कि वे मेरा फोन नहीं उठा रहे हैं और न ही संदेशों का जवाब दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। कांग्रेस नेता ने नसीहत देते हुए कहा कि पायलट के पास अभी उम्र है और कांग्रेस में बने रहते हैं तो उनका भविष्य उज्ज्वल है। उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत ने अगर उन्हें ठेस पहुंचाई भी है तो ऐसे मुद्दों को सौहार्दपूर्वक सुलझाया जाना चाहिए। सिंधिया ने जो गलती की, वह उन्हें नहीं करनी चाहिए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा विश्वसनीय नहीं है। किसी अन्य दल से भाजपा में गए किसी भी व्यक्ति को सफलता नहीं मिली है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि महत्वाकांक्षी होना बुरी बात नहीं है। बिना महत्वाकांक्षा के व्यक्ति आगे कैसे बढ़ सकता है, लेकिन महत्वाकांक्षा के साथ-साथ किसी को भी अपने संगठन, विचारधारा और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुझे पता चला है कि पायलट नई पार्टी बनाना चाहते हैं, लेकिन इसकी आवश्यकता ही क्या है। क्या कांग्रेस ने उन्हें कुछ नहीं दिया? उन्हें 26 की उम्र में सांसद, 32 की उम्र में केंद्रीय मंत्री, 34 की उम्र में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और 38 की उम्र में उपमुख्यमंत्री बनाया। इसके अलावा वह क्या चाहते हैं? दिग्विजय ने कहा कि अगर कोई ईश्यू था तो फिर वे प्रदेश अध्यक्ष के नाते खुद बैठक बुला कर उसमें चर्चा कर सकते थे। उन्हें करनी भी चाहिए थी। गहलोत के साथ मतभेदों को दूर करने के लिए पार्टी के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे के साथ बातचीत करते।

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