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संसद में कांग्रेस ने उठाया छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का मामला:आया पक्ष,विपक्ष आमने सामने

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नई दिल्ली। संसद के दोनों सदनों में बुधवार को कांग्रेस के सदस्यों ने छत्तीसगढ़ में केंद्रीय पूल के तहत धान की खरीद नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया और मांग की कि इस संबंध में बाधा बन रही नियमों में शिथिलता लाकर अन्य राज्यों की तरह वहां भी धान की खरीद की जाए। लोकसभा में इस मुद्दे पर कांग्रेस सदस्यों ने सदस्य से वाकआउट भी किया। वहीं भाजपा ने छत्तीसगढ़ सरकार पर राज्य के किसानों के धान खरीद पर न्यूनतम समर्थन मूल्य न देने का आरोप लगया है।राज्यसभा में बुधवार को कांग्रेस के मोतीलाल वोरा, छत्तीसगढ़ प्रभारी और राज्यसभा सदस्य पी.एल. पुनिया व छाया वर्मा ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया। पीएल पूनिया ने कहा कि पूरे देश में धान समर्थन मूल्य के अंतर्गत भारत सरकार और राज्य सरकारें खरीदती है। भारत सरकार एफसीआई के माध्यम से मई 2014 में एनडीए की सरकार बनी है, और एक महिने के अंदर एक आदेश जारी हुआ था उसमें लिखा गया कि जो राज्य सरकारें समर्थन मूल्य से अधिक बोनस देंगी तो समर्थन मूल्य में धान नहीं खरीदेंगे और सरप्लस चांवल उसको भी हम सेन्ट्रल पुल में नहीं लेगे। उन्हेंने कहा कि वहां की परिस्थिति को देखते हुये केन्द्र सरकार ने छूट दी कि ज्यादा बोनस देने के बावजूद हम उनसे खरीदेंगे। केन्द्र सरकार ने संकल्प लिया है कि हम किसान के आमदनी को दुगुना करेंगे। केन्द्र सरकार ने धान को 1815 रू. प्रतिक्विंटल में खरीदने का आदेश दिया। राज्य सरकार ने 2500 रूपये प्रतिक्विंटल में धान खरीदने का आदेश दिया और उस पर खरीद रहे है। जब केन्द्र सरकार का संकल्प है उसका पूरा करने में राज्य सरकार का अपना बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। उसको नाराजगी दिखाने के बजाय उसको पैरालाईज करने के बजाय, उनका प्रशंसा करना चाहिये। किसानों का हित महत्वपूर्ण है। किसान संकट में है। राज्य सरकार संकट में है। मेरा विशेष अनुरोध है कि सरकार की तरफ से रिस्पांस आये कि वो छत्तीसगढ़ सरकार के साथ कोई भेदभाव नहीं करेंगे और उनका धान खरीदेंगे। चांवल भी सेन्ट्रल पुल में खरीदेंगे।

लोकसभा में कांग्रेस का वाकआउट

उधर लोकसभा में बुधवार को कांग्रेस दल के नेता अधीर रंजन चौधरी, लोकसभा सदस्य दीपक बैज ने छत्तीसगढ़ के किसानों के धान से बने चावल को सेंट्रल पूल में लिए जाने की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया गया। इसके पहले संसद परिसर में ही हुई कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में बस्तर के लोकसभा सदस्य दीपक बैज ने कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी के समक्ष छत्तीसगढ़ के किसानों को धान के दाम 2500 रूपयक देने की बात को रखा। सोनिया ने आज संसद के दोनों ही सदनों में छत्तीसगढ़ के किसानों की आवाज उठाने के लिए कांग्रेस सांसदों को निर्देशित किया। कांग्रेस ने केंद्र सरकार को सवाल के घेरे में लेते हुए छत्तीसगढ़ में किसानों से भेदभाव का आरोप लगाया। अधीर रंजन चौधरी में छत्तीसगढ़ में धान खरीदी किसानों से सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया, जिसके बाद विपक्ष ने शोर मचाना शुरू कर दिया। करीब 15 मिनट हंगामें के बाद सभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हो पाई। गौरतल है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने इस मामले में प्रधान मंत्री को पत्र लिखकर 32 लाख मेट्रिक टन धान सेंट्रल पूल में खरीदने का अनुरोध किया है।

भाजपा ने राज्य सरकार पर साधा निशाना

शून्यकाल में ही छत्तीसगढ में राजनांदगांव से लोकसभा में भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय ने बुधवार को लोकसभा में छत्तीसगढ़ में किसानों के धान खरीदी, शराबबंदी, बोनस और समर्थन मूल्य का मुद्दा उठाया। उन्होने प्रदेश में धान खरीदी को लेकर देरी और किसानों को समर्थन मूल्य नहीं देने पर उन्होंने छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार पर जमकर हल्ला बोला।छत्तीसगढ़ से भाजपा सदस्य संतोष पांडे ने आरोप लगाया कि उनके राज्य में कांग्रेस की सरकार ने किसानों को छलने का काम किया है। चुनाव के दौरान कांग्रेस ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर तुरंत कर्जमाफी करेंगे, अनाज खरीदेंगे और शराबबंदी करेंगे, लेकिन ये वादे पूरे नहीं हुए। भाजपा नेता ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ की जनता पूछना चाहती है कि कर्जमाफी, अनाज खरीद और शराबबंदी के वादे पूरे क्यों नहीं हुए। धान खरीद में विलंब क्यों किया गया। राज्यसभा में शून्यकाल में भी यह मुद्दा उठा। कांग्रेस की छाया वर्मा, मोतीलाल वोरा और पी एल पुनिया ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वहां न्यूनतम समर्थन मूल्य 2500 रूपए प्रति क्विंटल होने की वजह से केंद्रीय पूल के तहत धान की खरीद नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि विगत में भी नियमों को शिथिल कर धान की खरीद की गयी है। इस बार भी उसी प्रकार धान की खरीद की जानी चाहिए ताकि किसानों का नुकसान नहीं हो। कांग्रेस सदस्यों ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। पांडेय ने कहा कि किसान अपनी फसल बिकने का इंतजार कर रहें हैं और धान खरीदी में देरी कर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी और उनके मंत्री बिचौलियों को फायदा पहुँचाना चाहते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। जो धान 15 नवम्बर तक खरीदे जाने थे उसे अब दिसंबर में खरीदने का तुगलकी फरमान जारी कर भूपेश सरकार मनमानी कर रही है। इससे किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और फसलें ख़राब हो रही हैं। आए दिन धान खरीदी के संबंध में बिचौलियों की मिलीभगत के बाते समाचार के माध्यम से मिल रही हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार मूकदर्शक बनकर बैठी हुई है।

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