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संसद में चुनावी बॉन्ड पर कांग्रेस का हंगामा:दोनों सदनों में भाजपा को मिले चंदे पर उठाए सवाल’

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नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में दोनों ही सदनों पर विभिन्न मुद्दों को लेकर कांग्रेस हंगामा कर रही है। लोकसभा में आज कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने शून्यकाल में इलेक्टॉरल बॉन्ड का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि चुनावी बॉन्ड जारी करने के कारण सरकारी भ्रष्टाचार को स्वीकृति दे दी। वहीं राज्यसभा में भी चुनावी बॉन्ड के मुद्दे पर कांग्रेस सांसदों और अन्य विपक्षी दलों ने हंगामा किया। चुनावी बॉन्ड का मुद्दा उठाते हुए उच्च सदन से कांग्रेस ने वॉकआउट भी किया जिसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

चुनावी बॉन्ड को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल

मनीष तिवारी ने इलेक्टॉरल बॉन्ड को सियासत में पूंजीपतियों का दखल करार दिया। उन्होंने कहा, ‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और चुनाव आयोग के विरोध के बाद भी चुनावी बॉन्ड जारी किए उससे सरकारी भ्रष्टाचार के ऊपर एक अमलीजामा चढ़ गया है। 2014 से पहले इस देश में एक मूलभूत ढांचा था। उस ढांचे के तहत जो धनपशु लोग हैं जो अमीर लोग हैं, उनका भारत की सियासत में पैसे के हस्तक्षेप पर एक नियंत्रण था। 1 फरवरी 2017 को इस सरकार ने अज्ञात इलेक्टॉरल बॉन्ड का प्रावधान किया। इस प्रावधान के बाद अब न तो जो डोनर है उसका पता चल सकता है और न कितना पैसा दिया गया का ही पता चल सकता है। सरकारी भ्रष्टाचार को इस सरकार ने अमली जामा पहनाने का काम किया है।

सरकार पर भ्रष्टाचार को व्यवस्था का हिस्सा बनाने का आरोप

तिवारी ने चुनावी बॉन्ड पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘1 फरवरी 2017 को इस सरकार ने अज्ञात इलेक्टॉरल बॉन्ड का प्रावधान किया। इस प्रावधान के बाद अब न तो जो डोनर है उसका पता चल सकता है और न कितना पैसा दिया गया और किस पार्टी को दिया गया, किसको दिया गया उसका ही पता चल सकता है। सरकारी भ्रष्टाचार को इस सरकार ने अमलीजामा पहनाने का काम किया है।

कर्नाटक चुनाव को लेकर उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद ने कर्नाटक चुनाव में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि आपको बहुत गंभीरता और जिम्मेदारी से कहना चाहता हूं कि पहले यह स्कीम सिर्फ लोकसभा के आम चुनाव तक सीमित थी। विडंबना की बात है कि 11 अप्रैल 2018 को कर्नाटक चुनाव से ठीक पहले इसे विधानसभा चुनाव में लागू किया गया।’ हालांकि, इस पर लोकसभा स्पीकर ने उन्हें टोकते हुए नाम नहीं लेने की हिदायत दी। जवाब में तिवारी ने कहा कि उनके पास आरटीआई के जरिए मिली सूचना और कागज है और वह इसे पटल पर रख देंगे।

राज्यसभा में नहीं हो सका शून्यकाल

चुनावी बॉण्ड और सार्वजनिक क्षेत्रों में विनिवेश को लेकर कांग्रेस और वामदलों द्वारा चर्चा कराए जाने के लिए दिए गए नोटिस को खारिज किए जाने से नाराज इन दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण गुरुवार को राज्यसभा में शून्यकाल नहीं हो सका। सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने और आवश्यक दस्तावेजों के सदन पटल पर रखे जाने के बाद सभापति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद और वामपंथी के के रागेश सहित कई सदस्यों ने चुनावी बॉण्ड एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में विनिवेश के विरोध में नोटिस दिया है। उन्होंने कहा कि वे इन नोटिस को मंजूर नहीं कर रहे हैं क्योंकि अभी यह जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि कल महत्वपूर्ण मुद्दा था तो सदस्यों को अनुमति दी गई थी।

क्या हैं चुनावी बॉन्ड?

सरकार राजनीतिक दलों को नकद में मिलने वाले चंदे के विकल्प के रूप में चुनावी बॉन्ड लेकर आई थी। 2017-18 के बजट के दौरान चुनावी बॉन्ड शुरू करने की घोषणा की गई थी। यह करंसी नोट की तरह ही होता है जिसके ऊपर इसकी कीमत लिखी होती है। चुनावी बांड 1000, 10,000 और 1 लाख और 1 करोड़ रुपये के मल्टीपल में खरीदे जा सकते हैं। भारतीय स्टेट बैंक की 29 शाखाओं को चुनावी बॉन्ड जारी करने और उसे भुनाने के लिए अधिकृत किया गया है। ये शाखाएं नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नै, गांधीनगर, चंडीगढ़, रांची और बेंगलुरु में स्थित हैं।

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