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कृषि बिल पर कांग्रेस लड़ेगी आर-पार की लड़ाई,किसानों के साथ पूरे देश में खड़े रहने की रणनीति अपनाएगी पार्टी

नई दिल्ली। कृषि बिल पर कांग्रेस आरपार की लड़ाई के मूड में है। सोमवार को पार्टी महासचिवों-प्रभारियों की बैठक में पार्टी ने तय किया है कि इस बिल पर पूरे देश में जोरदार प्रदर्शन कर लोगों को जागरूक किया जाएगा। किसानों से दो करोड़ फॉर्म भरवाकर सरकार को किसानों के गुस्से के प्रति सतर्क किया जायेगा। पार्टी किसानों और मजदूरों के होने वाले आंदोलनों को भी अपना पूर्ण समर्थन देगी। कृषि बिल पर सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए युवा कांग्रेस कार्यकर्ता मंगलवार को संसद का घेराव भी करेंगे। पार्टी उच्चाधिकारियों की बैठक में नेताओं ने माना है कि यह नया बिल ‘हरित क्रांति’ को हराने की साजिश करने वाला है। पार्टी के मुताबिक देश के 62 करोड़ किसान-मजदूर और 250 से अधिक किसान संगठन इन कानूनों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, पर सरकार हर विरोध को दरकिनार कर रही है। कांग्रेस ने कहा है कि कृषि राज्य सरकारों का विषय है लेकिन इतने बड़े बदलाव के पहले राज्यों से बातचीत तक नहीं की गई। बिल पास करने के लिए विपक्ष की मत विभाजन की मांग को भी ठुकरा दिया गया। पार्टी के मुताबिक एपीएमसी खत्म करने का बिहार के किसानों को कोई लाभ नहीं हुआ है। वहां के किसानों की हालत अन्य राज्यों के किसानों से बदतर हालत में है। यही प्रमाण है कि खुला बाजार किसानों के लिए लाभकारी नहीं है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि यह कानून किसानों की बजाय पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाएगा। कृषि सेंसस 2015-16 के मुताबिक देश का 86 फीसदी किसान पांच एकड़ से कम भूमि का मालिक है। जमीन की औसत मालिकाना हक दो एकड़ या उससे भी कम है। कांग्रेस के मुताबिक मंडियां खत्म होते ही अनाज-सब्जी मंडी में काम करने वाले लाखों-करोड़ों मजदूरों, आढ़तियों, मुनीम, ढुलाईदारों, ट्रांसपोर्टरों, शेलर आदि की रोजी-रोटी और आजीविका खत्म हो जाएगी। इससे राज्यों की आय भी खत्म हो जाएगी।

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