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संसद के शीतकालीन सत्र में आ सकता है डेटा संरक्षण विधेयक

नई दिल्ली। संसद के आगामी शीतकाली सत्र के दौरान केंद्र सरकार निजी डेटा संरक्षण विधेयक-2018 को शीतकालीन सत्र में संसद में पेश कर सकती है। इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूत्रों ने शुक्रवार को यह बात कही।

आईटी मंत्रालय के संयुक्त सचिव एस. गोपालकृष्णन ने यह भी बताया कि मंत्रालय ने इंफोसिस के सह-संस्थापक कृष गोपालकृष्णन की अध्यक्षता में एक समिति नियुक्त की है। यह समिति गैर-निजी डेटा के प्रबंधन के लिए सिफारिश देगी। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के एक कार्यक्रम में गोपालकृष्णन ने कहा कि ऐसी संभावना है कि इस शीतकालीन सत्र में विधेयक को संसद में पेश किया जाएगा, जिसका मसौदा तैयार है। विधेयक के पास होने के कुछ महीनों बाद एक नियामक नियुक्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नए कानून को लोग गंभीरता से लें इसलिए इसमें कुछ जुर्माने और क्षतिपूर्ति के प्रावधान रखे जाएंगे। निजी डेटा संरक्षण विधेयक 2018 का मसौदा न्यायमूर्ति बी.एन. श्रीकृष्ण की अगुवाई वाली उच्च स्तरीय समिति के सुझावों पर आधारित है। यह मसौदा निजी डेटा को देश से बाहर भेजने की शर्तों पर रोक और शर्तें लगाने और निजी सूचनाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए भारतीय डेटा संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना का सुझाव देता है। भुगतान प्रणाली से जुड़ी जानकारियों को भारत में ही संग्रहीत करने संबंधी आरबीआई के परिपत्र पर अधिकारी ने कहा कि इस विधेयक में इस मुद्दे का भी समाधान किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिजर्व बैंक एक वित्तीय नियामक है। जहां तक वित्तीय मामलों का सवाल है आरबीआई का फैसला अंतिम होगा। इसलिए विधेयक अहम एवं संवेदनशील जानकारियों को स्थानीय स्तर पर संग्रहीतकरने की सुविधा देगा।

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