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दिल्ली बच्चों पर होने वाले अपराधों के मामले में पहले और मुंबई दूसरे स्थान पर

नई दिल्ली। सूचना प्रौद्योगिकी के इस दौर में लगभग हर हाथ में मोबाइल आ जाने से जहां समाज को कई लाभ हुए हैं, वहीं इसके विपरीत परिणाम भी सामने आ रहे हैं। मुफ्त असीमित इंटरनेट पैकेज के चलते पॉर्न फिल्मों के सहज उपलब्ध होने व चाइल्ड पोर्नोग्राफी, वेबसाइट एवं वेब सीरीज पर सरकार एवं कानूनी नियंत्रण न होने के कारण आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों का सीधा शिकार नाबालिग बच्चे हो रहे हैं। जबकि बच्चों से यौन अपराध कानूनी तौर पर जघन्य माना गया है, जिसमें 10 वर्ष के आजीवन कारावास एवं मृत्यु दंड तक का प्रावधान है। इसके बावजूद बाल यौन अपराधों के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। एनसीआरबी के 2015-17 के आंकड़े और संस्था पौरुष व राष्ट्रीय पुरुष आयोग समन्वय समिति दिल्ली द्वारा 2018 में किए गए सर्वे के अनुसार देशभर के शीर्ष पांच शहरों में बाल यौन अपराधों की स्थिति को देखा जाए तो देश के टॉप पांच शहरों में 2018 में दिल्ली, बाल यौन शोषण के 7,665 मामलों के साथ अव्वल रहा, वहीं मुंबई 4,206 मामलों के साथ दूसरे, बंगलूरू 1771 मामलों के साथ तीसरे, पुणे 1508 चौथे और इंदौर 941 मामलों के साथ पांचवें स्थान पर रहा है। इंदौर में बाल यौन अपराधों के प्रतिदिन औसतन 2.6 और हफ्ते में 18 मामले दर्ज होते हैं। इसी तरह देश के शीर्ष सात प्रदेशों में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, गुजरात और मध्यप्रदेश क्रमशः पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, पांचवें, छठे और सातवें स्थान पर हैं।  रिपोर्ट के अनुसार यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम 2002 में बनाया गया था। इसमें संशोधन कर नया विधेयक 2019 में बनाया गया, जो यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से बच्चों के संरक्षण जैसे उपबंध करता है।

18 राज्यों में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित-सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की पीठ ने पॉक्सो एक्ट के तहत विशेष अदालतें गठित करने का आदेश दिया था। इसके तहत बच्चों के खिलाफ यौन अपराध और बलात्कार के मामलों की त्वरित सुनवाई हेतु केंद्र सरकार ने 1,023 विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें गठित करने की मंजूरी दी थी, जिसमें 18 राज्यों में ऐसी अदालतें गठित की जा चुकी हैं। सरकार ने यौन अपराधियों का एक राष्ट्रीय डाटा-बेस बना रखा है, जिसमें 6,20,000 अपराधियों को शामिल किया गया है। संस्था पौरुष इंदौर के अध्यक्ष और राष्ट्रीय पुरुष आयोग समन्वय समिति दिल्ली के राष्ट्रीय प्रवक्ता अशोक दशोरा के मुताबिक पॉर्नसाइट पर बैन लगाना एवं सामाजिक चेतना को जागृत करना बेहद जरूरी है।

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