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विपत्ति में कोई साथ नहीं देता,अंहकार मनुष्य का शत्रु है-देवकीनंदन ठाकुर जी

शुकतीर्थ(मुजफ्फनगर)।
विश्व शांति सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा शुक तीर्थ में कथा के चौथे दिन कथा व्यास परम पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने गजराज कथा सुनाते हुए संबोधन में सर्वप्रथम कहा कि गजराज परिवार जंगल में विचरण कर रहा था जल में खेल करने लगा।जल क्रीडा करते हुए गजराज दलदल में समाने लगा वही मगरमच्छ ने गुजराज का पांव पकड़ लिया और नीचे जल की ओर खींचने लगा । गजराज के परिवार ने सभी प्रयास किए परंतु प्रयास विफल रहने की स्थिति में सब छोड़ कर चल दिए यह इंगित करता है कि विपत्ति में कोई साथ नहीं देता जब गजराज डूबने लगा अर्थात उसका अहंकार समाप्त होने लगा तो उसने भगवान को याद किया गोविंद नाम लिया और कहते हैं कि बिन नाम भी पूरा नहीं लिया गोरी कहा और भगवान प्रकट हो गए भगवान श्रीकृष्ण पहले मगर का उद्धार किया फिर गजराज का कल्याण किया इसमें भी गजेंद्र मोक्ष की कथा सुन श्रवण करते हैं परंतु आत्म कल्याण के लिए नहीं हम मूल पाठ तो कर आते हैं परंतु श्रम के कल्याण के लिए नहीं धन वृद्धि के लिए, फैक्टरी लगाने के लिए भी हम मूल पाठ कर आते हैं आज के उद्देश्य बदल गए हैं समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए महाराज श्री ने कहा समुद्र मंथन में मोहिनी अवतार ले भगवान ने देवताओं का उद्धार किया यही है कि किसी का अच्छा हो तो अच्छा ही सोचना चाहिए कहते हैं राहुल को अमृत मान कराते हुए सूर्य और चंद्रमा ने बाधा डाली और सहज के प्रमाण है आज भी सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण लगता है अच्छा हो रहा हो तो रुकावट नहीं करनी चाहिए मनुष्य की प्रवृत्ति कहीं ना कहीं दूषित होती जा रही है आज जानवरों को अधिक वफादार दृष्टि से देखा जाता है इसके बाद भी हम चाय अपने आपको फालतू ही कह लें परंतु भगवान के सानिध्य में रहकर भगवान के स्वान बनने पर भी हमारा कल्याण निश्चित है पालतू स्वान को समाज में भी हानि नहीं। बिना किसी गुरु से बंधे दुख के समुद् में डूबे रहते हैं। परोपकार आत्म कल्याण का सरल साधन है, किसी भूखे को भोजन करा देना किसी जरूरतमंद की जरूरतें पूरी कर देना श्रेष्ठ परोपकार है आज कथा का समापन भव्य श्री कृष्ण जन्म से हुआ कृष्ण जन्म की कथा में झूमते हुए श्रद्धालुओं ने नंद के आनंद भयो जय कंहैया लाल की हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की पूरा पंडाल झूम उठे वहीं कथा के मुख्य अतिथि परम पूज्य करपात्री जी महाराज के परम शिष्य स्वामी अशोकानंद सरस्वती जी महाराज ने व्यास पूजन कर कथा का शुभारंभ किया तत्पश्चात मुख्य यजमान दिल्ली से पधारे श्री मुकेश पांडे जी ने से पत्नी भागवत पीठ का पूजन संपन्न कराया इस अवसर पर मुख्य रूप से महामृत्युंजय सेवा मिशन अध्यक्ष पंडित संजीव शंकर, एस पी अग्रवाल, जेपी सिंघल, सुरेश गोयल जयपुर, सतीश गर्ग आगरा, मुख्य रूप से उपस्थित रहे वहीं कथा का कुशल संचालन विजय शर्मा जी द्वारा किया गया

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