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रसातल में गई अर्थव्यवस्था, लोग मांग रहे वित्तमंत्री का इस्तीफा

नई दिल्ली। कोरोना महामारी के चलते हुई पूर्ण तालाबंदी के बाद जिस बात की सबसे ज्यादा चिंता थी, वह सामने आ खड़ी हुई। सब कुछ होने से देश की अर्थव्यवस्था लुढ़क कर माइनस में चली गई। घोर मंदी का दौर चल रहा है। जो आंकड़े आ रहे हैं, उसके मुताबिक 2020-21 के पहली तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में करीब 24 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है। बीते 40 साल में अब तक की यह सबसे बड़ी गिरावट कही जा रही है। अर्थव्यवस्था में इतनी बड़ी गिरावट के बाद लोग केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

सांख्यकी विभाग की ओर से सोमवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक कोर सेक्टर के आंकड़ों ने भी निराश किया है। जुलाई महीने में आठ इंडस्ट्री के उत्पादन में 9.6 फीसदी की गिरावट आई है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पहली तिमाही में स्थिर कीमतों पर यानी रियल जीडीपी 26.90 लाख करोड़ रुपये की रही है। ​पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 35.35 लाख करोड़ रुपये की थी। इस तरह इसमें 23.9 फीसदी की गिरावट आई है। पिछले साल इस दौरान जीडीपी में 5.2 फीसदी की बढ़त हुई थी। दरअसल, इस तिमाही में दो महीने यानी अप्रैल और मई में लॉकडाउन की वजह से अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप रही है और जून में भी इसमें थोड़ी ही रफ्तार मिल पाई। इस वजह से रेटिंग एजेंसियों और इकोनॉमिस्ट ने इस बात की आशंका जाहिर की है कि जून तिमाही के जीडीपी में 16 से 25 फीसदी की गिरावट आ सकती है।

औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों, केंद्र और राज्य सरकारों के व्यय आंकड़ों, कृषि पैदावार और ट्रांसपोर्टए बैंकिंग, बीमा आदि कारोबार के प्रदर्शन के आंकड़ों को देखते हुए यह आशंका जाहिर की जा रही है। जानकारों का कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग, निर्माण, व्यापार, होटल, ट्रांसपोर्ट, संचार आदि सेक्टर देश की जीडीपी में करीब 45 फीसदी का योगदान रखते हैं और पहली तिमाही में इन सभी सेक्टर के कारोबार पर काफी बुरा असर पड़ा है।

जीडीपी में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज होने पर लोग केंद्रीय वित्तमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। ट्वीटर पर #ResignNirmala के जरिए अभियान चला दिया है, जो काफी ट्रेंड हो रहा है। लोगों की नाराजगी का कारण निर्मला सीतारमण वह टिप्पणी भी है, जो उन्होंने जीएसटी काउंसिल की बैठक में कहा था। जीएसटी का पैसा राज्यों को नहीं दे पाने की केंद्र सरकार की बेबसी बताते हुए निर्मला ने कोरोना का जिक्र करते हुए देश के आर्थिक हालात को एक्ट ऑफ गॉड बताया था। यानि भगवान ने ऐसे हालात बना दिए। जबकि तमाम ट्वीटर यूजर इसके लिए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार कह रहे हैं।

राहुल गांधी का आरोप, गुलाम बनाना चाहती है बीजेपी

विपक्षी दल कांग्रेस ने भी गिरती अर्थव्यवस्था पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बीजेपी लोगों को गुलाम बनाना चाहती है। उन्होंने ट्वीटर पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने देश की असंगठित अर्थव्यवस्था को तोड़ कर अपने कब्जे में लेना चाहती और लोगों को गुलाम बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि 3 मिनट 38 सेकंड के वीडियो में राहुल ने बताया कि 2008 में यूपीए सरकार के वक्त भी मंदी आई थी। अमेरिका, यूरोप, चीन समेत तमाम देश इस मंदी में ढह गए थे, लेकिन भारत पर इसका कोई असर नहीं पड़ा था। इससे वे अचंभित थे। इस बारे में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कारण जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि भारत में दो तरह की अर्थव्यवस्था है। एक संगठित, जो बड़े कारोबार, उद्योग, व्यापार आदि से संचालित होता है और दूसरा असंगठित अर्थव्यवस्था, जो छोटे-मझोले व्यापारी, कारोबारी, सूक्ष्म, लघु उद्योगों, रेहड़ी-पटरी वालों, किसान, मजदूर आदि से संचालित होती है। जीडीपी में 90 फीसदी की हिस्सेदारी असंगठित क्षेत्र की है, जो लॉकडाउन के दौरान की गई पूर्णबंदी के चलते प्रभावित हुई है। राहुल ने आरोप लगाया कि असंगठित अर्थव्यवस्था पर मोदी सरकार ने तीन हमले किए। एक नोटबंदी, दूसरा जीएसटी और तीसरा लॉकडाउन।

 

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