Press "Enter" to skip to content

राज्यो से रेलवे परियोजनाओं में सहयोग करने की अपेक्षा: पीयूष गोयल

नई दिल्ली। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रेलवे की परियोजनाओं के लिये राज्यों से सहयोग की अपील करते हुए बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल, केरल जैसे राज्यों में ठीक ढंग से भूमि अधिग्रहण नहीं होने सहित अन्य कारणों से परियोजनाओं पर काम नहीं बढ़ पा रहा है । लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान मलूक नागर के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए गोयल ने कहा कि कुछ राज्यों में तेज गति से काम हो रहा है क्योंकि ऐसे राज्य तेजी से भूमि अधिग्रहण कर रहे हैं, परियोजना में अपने हिस्से का पैसा दे रहे हैं और जरूरी वन एवं पर्यावरण मंजूरी का काम पूरा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ राज्य परियोजनाओं में कम रुचि दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन राज्यों में जनता को यह बताना पड़ेगा कि परियोजनाएं रूकी हुई है क्योंकि ऐसा लगता है कि इन राज्यों में जनता का दबाव आयेगा तभी काम बढ़ेगा। रेल मंत्री ने कहा कि मिसाल के तौर पर पश्चिम बंगाल में एक परियोजना 1974 से अब तक पूरी नहीं हो पायी है। उन्होंने कहा कि 45 वर्ष हो गए लेकिन अब तक लागू नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार से केरल में नौ परियोजनाएं चालू हैं लेकिन एक पर भी कम नहीं बढ़ पा रहा है। राजस्थान का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा कि वहां कई परियोजनाएं चल रही है और कई में काम अटक गया है। उन्होंने बताया कि राजस्थान सरकार ने पहले कहा था कि वह अपने हिस्से का पैसा देगी, जमीन देगी लेकिन अब मुकर रही है। मैंने प्रदेश सरकार को इस बारे में पत्र लिखा है। रेल मंत्री ने कि रेलवे को कभी भी राज्यों में नहीं बांटा जाना चाहिए, इसको लेकर राज्यों की राजनीति नहीं करनी चाहिए क्योंकि भारतीय रेलवे पूरे देश की है।

रेलवे की खाली भूमि पर योजनाएं शुरू : पीयूष गोयल-रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को बताया कि मंत्रालय ने निजी भागीदारी के साथ स्टेशनों के आसपास अतिरिक्त भूमि पर रियल इस्टेट संभावना को ध्यान में रखते हुए रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की योजना बनाई है। लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में रेल मंत्री ने कहा कि आकांक्षी जिलों में से मध्यप्रदेश में खंडवा और सिंगरौली स्टेशनों, बिहार राज्य के औरंगाबाद, बेगूसराय, गया और मुजफ्फरपुर स्टेशनों, झारखंड के बोकारो एवं रांची स्टेशनों, ओडिशा के रायगड़ा स्टेशन, राजस्थान के जैसलमेर स्टेशन के पुनर्विकास के लिये तकनीकी आर्थिक व्यवहार्यता अध्ययन की योजना बनाई गयी है। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास कार्यक्रम अपनी तरह की पहली कार्ययोजना है और इसके लिये तकनीकी आर्थिक व्यवहार्यता अध्ययन की जरूरत होती है। इसमें बोली से पूर्व विभिन्न पक्षकारों के साथ विचार विमर्श की जरूरत होती है । इसके लिये शहरी/स्थानीय निकायों से विभिन्न सांविधिक मंजूरी की जरूरत होती है। गोयल ने कहा कि इसलिये, इस समय किसी समय सीमा का उल्लेख नहीं किया जा सकता है।

More from राजनीतिMore posts in राजनीति »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *